भगवान महावीर स्वामी का अहिंसा का सिद्धांत केवल शारीरिक हिंसा से बचने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विचार, वाणी और व्यवहार की पवित्रता पर आधारित एक जीवनदृष्टि है। वर्तमान समय की सामाजिक अशांति और मानसिक तनाव के बीच, यह सिद्धांत आंतरिक शांति, सहानुभूति और सामाजिक समरसता के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। अहिंसा को आत्मिक जागरूकता और करुणा के रूप में अपनाकर हम व्यक्तिगत और सामाजिक सुधार की दिशा में अग्रसर हो सकते हैं। पढ़िए महावीर जयंती पर श्रीफल जैन न्यूज की संपादक रेखा संजय जैन का विशेष आलेख….






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