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ऋषभदेव महोत्सव में महा अर्चना विधान का आयोजन : आचार्य पुलक सागर जी महाराज के सानिध्य में किया गया सकलीकरण


भारत गौरव राष्ट्र संघ आचार्य पुलक सागर जी महाराज द्वारा संचालित भट्टारक यश कीर्ति दिगंबर जैन गुरुकुल में आयोजित ऋषभ कथा एवं महा अर्चना विधान के सातवें दिन आज महा अर्चना विधान का आयोजन किया गया। विधानाचार्य सुधीर मार्तंड ने जानकारी दी कि आज पूज्य गुरुदेव आचार्य पुलक सागर जी महाराज के सानिध्य में सकलीकरण किया गया। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


ऋषभदेव। भारत गौरव राष्ट्र संघ आचार्य पुलक सागर जी महाराज द्वारा संचालित भट्टारक यश कीर्ति दिगंबर जैन गुरुकुल में आयोजित ऋषभ कथा एवं महा अर्चना विधान के सातवें दिन आज महा अर्चना विधान का आयोजन किया गया। विधानाचार्य सुधीर मार्तंड ने जानकारी दी कि आज पूज्य गुरुदेव आचार्य पुलक सागर जी महाराज के सानिध्य में सकलीकरण किया गया। इसके बाद इंद्र प्रतिस्थापना और मंडप प्रतिस्थापना का कार्य संपन्न हुआ। इसके उपरांत अभिषेक किया गया, जिसमें समाज के अध्यक्ष भूपेंद्र वालावत ने महा शांतिधारा की। विधानाचार्य ने आगे बताया कि महा शांतिधारा के पश्चात लगभग 250 इंद्र और इंद्राणियों की उपस्थिति में गुरुदेव द्वारा लिखित जिनेंद्र महाअर्चना विधान की शुरुआत हुई, जिसमें गर्भ कल्याणक के अंतर्गत चौबीस तीर्थंकरों की पूजा की गई।

संध्याकालीन केवलज्ञान के पश्चात आचार्य श्री द्वारा घनधर वृषभ सेन के रूप में दिव्य ध्वनि प्रस्तुत की गई। साथ ही, 8 भूमि और 12 सभा युक्त महामनोहरी समवशरण की रचना भी की गई। संध्या में आरती के बाद, पुलक मंच परिवार की महिला सदस्यों ने “बोया पेड़ बबुल का तो आम कहा से होय” नामक नाटक प्रस्तुत किया। आज मां पद्मावती को वस्त्र धारण करवाने और महाप्रसाद का लाभ बिहारी लाल नोगामा परिवार द्वारा अर्पित किया गया, जिसमें प्रसाद का वितरण भी किया गया।

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