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होली के अवसर पर कवि सम्मेलन : प्रभु रंग में रंग जाएं, हम ऐसा रंग लगाएं हम


कुंडलपुर में होली-धुलेंडी के पावन पर्व पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पूज्य आचार्य श्री विनम्रसागर जी महाराज ससंघ एवं पूज्य आचार्य श्री विहर्षसागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में कवि सम्मेलन में हुआ। पढ़िए जय कुमार जलज हटा/राजेश रागी बकस्वाहा की विशेष रिपोर्ट…


कुण्डलपुर। सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में होली-धुलेंडी के पावन पर्व पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पूज्य आचार्य श्री विनम्रसागर जी महाराज ससंघ एवं पूज्य आचार्य श्री विहर्षसागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में कवि सम्मेलन में पूज्य आचार्य श्री विनम्र सागर जी महाराज ने कहा आप लोग होली के डर से यहां कुंडलपुर आए हैं। कोई रंग ना लगा दे, हम भी शहर से डरकर यहां क्षेत्र पर आए हैं। आचार्य श्री ने अपनी रचनाओं की शुरुआत …जीवन है पानी की बूंद कब मिट जाए रे काव्य ग्रंथ की पंक्तियां सुनाते हुए ज्ञान गुलाल उड़ाएं, हम होली आज मनाएं हम। प्रभु रंग में रंग जाएं हम ऐसा रंग लगाएं हम। खुद ही मुनि मन जाएं हम तभी बाबा की मूरत नजर आए रे।

जीवन है पानी की बूंद कब मिट जाए रे। होनी अनहोनी कब घट जाए रे…से की। उन्होंने आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की महिमा बताते हुए कहा कि देखो महिमा छोटे बाबा की बड़े बाबा से जो मिलाते हैं,ज्ञान देते हैं, ख्वाब देते हैं, शिष्यों को बेहिसाब देते हैं। खुशी देते हैं, मुस्कुराहट भी, मेरे गुरुवर गुलाब देते हैं। आचार्य श्री ने और भी रचनाएं प्रस्तुत करते हुए कहा, क्या लेकर तू आया था क्या लेकर तू जाएगा। अपना किसे बनाएगा अपना किसे बताएगा। मुट्ठी बांधे आया था हाथ पसारे जायेगा।

तेरा ही कर्म तेरा साथ निभाये रे। जीवन है पानी की बूंद कब मिट जाए रे होनी अनहोनी कब घट जाए रे। इस अवसर पर आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज ने भी कुछ रचनाएं प्रस्तुत करते हुए कहा, जहां न पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि, जहां न पहुंचे कवि वहीं पहुंच जाते हैं अनुभवी। शिखरजी के मुद्दे पर कहा, समाज में एकता की आवश्यकता है हम सबको एकता दिखानी होगी। आचार्य श्री ने कहा जो सिरफिरे होते हैं, वही इतिहास रचते हैं। उन्होंने कहा आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने कुंडलपुर को माली की तरह तराशा है। कवि सम्मेलन में कवि पंकज फनकार मुंगावली ने काव्य पाठ करते हुए कहा, संसार की माया को नश्वर जो समझते हैं, केवल वही मानव जिन रूप में ढलते हैं।

डॉ. मनीषा जैन ने सुनाया, इंसान-इंसान बनकर दिखाओ धर्म की जहां में सुगंध बिखराओ। अजय अहिंसा ने संचालन करते हुए कहा, बड़े बाबा की देखो महिमा बड़ी इनके गुणगान गाओ घड़ी दो घड़ी। इस अवसर पर डॉ. अखिल आनंद सागर ने काव्य पाठ करते हुए कहा, आदि देव भगवान आपके दर्शन को ललचाया हूं। मैं गुलाल लेकर भक्ति की शरण आपकी आया हूं। सौरभ भयंकर चंदेरी ने ओज पूर्ण कविता सुनाते हुए कहा, तुम क्या जानो जैन धर्म, जैन संतो को। वीरेंद्र विद्रोही ललितपुर ने काव्य पाठ के दौरान कविता सुनाते हुए कहा, बूढ़ी मां को वृद्ध आश्रम में बेटे जो भिजबाते हैं ऐसे बेटों को माफ नहीं कर पाते हैं। कवि सम्मेलन के प्रारंभ में शुभी जैन जबलपुर ने मंगलाचरण किया। कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष चंद्रकुमार सराफ एवं पदाधिकारी सदस्यों द्वारा चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं आमंत्रित कवि गणों का सम्मान किया गया।

सभी ने श्रीफल समर्पित कर आचार्य संघों से आशीर्वाद प्राप्त किया। प्रातः बेला में भक्तांमर महामंडल विधान,पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, विधान संपन्न हुआ। रात्रि में भक्तामर, दीपअर्चना एवं पूज्य बड़े बाबा की महाआरती संपन्न हुई।

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