आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वाधान में शुक्रवार को हरि पर्वत स्थित एम.डी. जैन इंटर कॉलेज के आचार्य श्री शांति सभागार में एक भव्य धर्मसभा का आयोजन किया गया। आगरा से पढ़िए, राहुल जैन की यह रिपोर्ट…
आगरा। आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वाधान में शुक्रवार को हरि पर्वत स्थित एम.डी. जैन इंटर कॉलेज के आचार्य श्री शांति सभागार में एक भव्य धर्मसभा का आयोजन किया गया। यह धर्मसभा आचार्य श्री इन्द्रनंदी जी महाराज ससंघ और गणिनी शिरोमणि आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी एवं विज्ञमति माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में आयोजित हुई। धर्मसभा का शुभारंभ आगरा दिगंबर जैन परिषद के पदाधिकारियों द्वारा भगवान महावीर स्वामी के चित्र का अनावरण और दीप प्रज्वलन कर किया गया। इसके बाद श्री शांतिनाथ महिला मंडल द्वारा सुमधुर मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया, जिससे पूरा सभागार भक्तिमय हो उठा। सभा को संबोधित करते हुए आर्यिका विकर्षमति माताजी ने जीवन में विचारों की शुद्धि पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि हमारा आचरण हमारे विचारों के अनुरूप ही तय होता है। विचार दो प्रकार के होते हैं—एक मिथ्या विचार और दूसरा शुद्ध विचार। माताजी ने दोनों विचारों के अंतर को समझाते हुए कहा कि जब हम किसी की बुराई करते हैं या किसी को नीचा दिखाने का प्रयास करते हैं, तो वह मिथ्या विचार है। किसी को नीचा दिखाकर भले ही कोई खुश हो ले, लेकिन वास्तव में वह अपने लिए पाप कर्मों का बंध कर रहा होता है। जब हमारे मन में प्राणिमात्र के प्रति दया का भाव जागृत होता है, तो वह सम्यक दृष्टि और शुद्ध विचार कहलाता है।
चील की नजर नहीं, सम्यक दृष्टि अपनाएं
आर्यिका श्री ने एक मर्मस्पर्शी उदाहरण देते हुए कहा कि सम्यक दृष्टि जीव हमेशा जमीन से आसमान की तरफ (उच्च आदर्शों की ओर) देखता है। इसके विपरीत, मिथ्या दृष्टि जीव आसमान में उड़ने वाली उस चील की भांति होता है, जिसकी नजरें इतनी ऊंचाई पर होकर भी जमीन पर पड़े मांस के टुकड़े (दूसरों की कमियों और वासनाओं) पर टिकी रहती हैं। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से आह्वान किया कि यदि इस संसार में अपना भव (जन्म-मरण का चक्र) सुधारना है, तो अपने विचारों को हमेशा शुद्ध रखें और सभी जीवों पर दया भाव रखें।
पुरुषार्थ करके संसार बढ़ा सकता है
मुनि श्री उत्कर्ष नंदी महाराज जी ने अपनी अमृतवाणी से कहा कि समझेंगे तभी संसार से पार होने के रास्ते मिल सकते हैं। जिसने जान लिया कि दूध में घी है। जिसने जान लिया कि दूध में घी है, दूध में घी में दूध नहीं है, दूध में घी है। घी अलग है, छाछ अलग है। दोनों चीजें दूध में प्राप्त हो सकती हैं। जिसे जो चाहिए वो ले सकता है। अगर घी चाहिए तो छाछ को अलग कर दो और छाछ चाहिए तो घी को अलग कर दो। इसी प्रकार संसार में जो प्राणी हैं, वो पुरुषार्थ करके चाहे तो मोक्ष प्राप्त कर सकता है और चाहे तो पुरुषार्थ करके संसार बढ़ा सकता है।
चार प्रकार के पुरुषार्थ बताए गए हैं
धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष
धर्म पुरुषार्थ अगर करेगा जीव, और धर्म पूर्वक काम को, अर्थ को सेवन करेगा तो मोक्ष को प्राप्त कर सकता है, मोक्ष पद को प्राप्त कर सकता है। लेकिन संसार का प्राणी धर्म को भूल जाता है। अर्थ और काम पुरुषार्थ के पीछे लगा रहता है। पूरा जीवन पैसा कमाने में और विषयों को, भोगों को भोगने में पूरा कर देता है।
धर्म पुरुषार्थ के द्वारा मोक्ष को प्राप्त कर सकता है
धर्म को भूल जाता है और जब धर्म को भूल गया तो मोक्ष तो भूल ही जाएगा, प्राप्त होना ही नहीं है। ज्ञानी जीव की पहचान है, धर्म पूर्वक अर्थ कमाए, मर्यादा पूर्वक भोगों को भोगे, तो कोई दिक्कत नहीं। वो क्रमशः मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। धर्म पुरुषार्थ के द्वारा मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। अगर वो अर्थ में, काम में लगा रहा, तो वो इसी संसार में, चार गतियों में परिभ्रमण करता रहेगा।
मोक्ष के लिए भेद-विज्ञान होना ज़रूरी है
मोक्ष प्राप्त करने के लिए भेद-विज्ञान होना ज़रूरी है और आत्मा और शरीर को अलग करना इतना सहज, इतना आसान नहीं है। जब तक आदमी भेद-विज्ञान प्राप्त नहीं करेगा, तब तक आगे नहीं बढ़ पाता। मोक्ष मार्ग में भेद-विज्ञान सोचने से, पढ़ने से, सुनने से नहीं होता। इसके लिए प्रयत्न पूर्वक पुरुषार्थ करना पड़ता है। बहुत अधिक पुरुषार्थ की आवश्यकता पड़ती है। धर्मसभा का संचालन महामंत्री मनीष जैन ठेकेदार द्वारा किया गया l
यह समाजजन मौजूद रहे
धर्म सभा मे मुख्य रूप से पूर्व महामंत्री सुनील जैन ठेकेदार, परिषद के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद जैन, महामंत्री मनीष जैन ठेकेदार, कोषाध्यक्ष राकेश जैन पर्दे वाले, उपमंत्री विमल जैन, अनंत जैन, प्रचार मंत्री आशीष जैन मोनू, कुमार मंगलम जैन, मनीष जैन लवली, पंकज जैन, रवि जैन, सुरेन्द्र जैन, सुशील जैन आदित्य जैन, उषा जैन, बीना बैनाड़ा अनीता जैन सकल जैन समाज मौजूद था। 13 जून को प्रातः 8:15 बजे से मुनि संघ एवं आर्यिका की मंगल प्रवचन आचार्य शांतिसागर सभागार, हरिपर्वत आगरा में होंगे।













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