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सम्मेद शिखरजी की तलहटी में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव सम्पन्न:
निमियाघाट में अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर जी का पावन सानिध्य मिला

सम्मेद शिखर के तलहटी निमियाघाट में अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महामुनिराज के सानिध्य में भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव संपन्न हुआ।निमियाघाट -पारसनाथ में जैन संत अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महामुनिराज के सानिध्य में सम्मेदशिखर जी की तलहटी के अतिशय क्षेत्र निमियाघाट में पंचकल्याणक महामहोत्सव के बारे में विस्तार से पढ़िए कोडरमा मीडिया प्रभारी और हमारे सहयोगी राजकुमार अजमेर की यह रिपोर्ट 


पवित्र पारसनाथ की पहाड़ियों के बीच, पांचवा दिन मोक्ष कल्याणक पर्व के रूप में मनाया गया। पारसनाथ का पवित्र माहौल और उस पर अंतर्मना आचार्य श्री का पावन सानिध्य, इस अद्भुत संयोग में पांच दिनों तक पंचकल्याण कार्यक्रम की धूम रही ।

निमियाघाट में हुए पंचकल्याणक में पांचवे दिन यह हुए कार्यक्रम

प्रातः सुबह भगवान की पूजा अभिषेक के साथ राजेश जैन अग्नि कुमार देव के द्वारा अग्नि लगाते ही भगवान का मोक्ष हुआ। इस अवसर पर आचार्य श्री ने कहा कि ऐसा पंचकल्याणक पहली बार हुआ है, जिसमें किसी भी तरह का कोई डाक नहीं हुआ। इसमे सभी पात्र को त्याग के रूप में बनाया गया और पांचों दिन में कोई डाक कोई रसीद कोई चंदा नहीं किया गया । अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी ने कहा कि विजय कासलीवाल द्वारा किया आयोजित इस कार्यक्रम की यह विशेषता रही।

आयोजन में आए संतों और गणमान्य लोगों ने मंदिर निर्माण कर्ता विजय-राजू कासलिवाल को बहुत बहुत साधु वाद दिया।पंचकल्याणक में बैठे सभी इन्द्रगण ने कासलिवाल को माला मुकुट,शाल उढ़ाकर स्वागत किया आचार्य श्री ने आगे कहा कि इन्द्रों को इंद्र बनने के बाद अपने आप को धर्म के मार्ग पर लगाते हुए ज्यादा से ज्यादा त्याग की ओर बढ़ना चाहिए।

आचार्य श्री ने अपने गुरु पुष्पदंत सागर जी सीख सबको बताई

आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज ने कहा कि भगवान को पत्थर से भगवान बनाने में आप ने सभी क्रियाएं की, उसी तरह अपने जीवन को भी त्याग और तप कर उत्कृष्ट श्रावक बनाना चाहिए । आचार्य श्री ने कहा कि हमारे आचार्य श्री 108 पुष्प दंत सागर जी गुरूवर ने हमको तीन बातें का सूत्र दिया है पहला जिस समाज में जाओ वहां की पध्दति को नही छेड़ना, दूसरा समाज के किसी वाद-विवाद को नहीं सुलझाना चाहिए। तीसरा, समाज में हमेशा मीठा-मीठा परोसना चाहिए।

आचार्य श्री ने करवाया स्वर्णमयी कलशारोहण

कार्यक्रम के बाद मंदिर में कलशारोहण किया गया। साथ ही आज निमियाघाट के पुराने अतिशय उक्त 1008 पारसनाथ भगवान की मंदिर में स्वर्णमयी कलशारोहण आचार्य श्री ने कराया । दिन में स्वाध्याय क्लास के बाद अन्तर्मना आचार्य श्री के द्वारा निमियाघाट में 20 कमरों का संत निवास का शिलान्यास किया।संध्या में उपाध्याय सौम्य मूर्ति 108 पीयूष सागर जी मुनिराज के निर्देशन में गुरुभक्ति की गई साथ ही पूरा पंचकल्याणक में पूरा निर्देशन दिया, इस अवसर पर कहा कि

मार्ग समाप्त मंजिल की प्राप्ति है, यही मोक्ष कल्याणक है। इस पंचकल्याणक के मुख्य प्रतिष्ठा चार्य ओर सभी कार्यक्रम को संयोजन ब्रमचारी तरुण भैया ने किया ।आचार्य श्री संघ के संघपति दिलीप जैन हुम्मड ने बताया कि आचार्य ससंघ का मंगल विहार 23 फरवरी को रांची की ओर हो रहा है और आकाश जैन ने बताया कि फुसरो ,बोकारो ,होते हुवे 5 मार्च तक रांची पहुंचने की संभावना है। इस कार्यक्रम में विशेष रूप से मनोज-वंदना गंगवाल धनबाद आदि शामिल हुए ।

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