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टीकमगढ़ में गूंजी मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी की वाणी: श्रावकों को संदेश– पूज्य बनों या पूजा करो


टीकमगढ़ की धरा पर बिराजे मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज की वाणी इन दिनों यहां के श्रावकों को आनंदित कर रही है। टीकमगढ़ में इन दिनों जिनेन्द्र त्रिकाल चौबीस पंच कल्याणक महोत्सव चल रहा है। जिसमें नंदीश्वर मैदान में मुनि श्री ने धर्मसभा में अपने प्रवचन दिए। मुनि श्री की वाणी और आयोजन में हुई धार्मिक गतिविधियों के लिए पढ़िए, हमारे सहयोगी राजीव सिंघई की यह रिपोर्ट


टीकमगढ़ में आयोजित हो रहे जिनेन्द्र त्रिकाल चौबीस पंच कल्याणक महोत्सव के तहत नंदीश्वर मैदान में बिराजे मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के प्रवचन, श्रावकों को जीवन के यथार्थ से जोड़ रहे हैं । मुनि श्री ने जीवन शैली की व्याख्या करते हुए बताया गया कि सिर्फ दो ही रास्ते हैं या तो पूजा करो या फिर पूज्य बनों। चमत्कार तो मन्दिर के धोती दुपट्टा में भी हो जायेगा। लेकिन उत्तम यह है कि इसकी सही विधि करें ।

महोत्सव के मुख्य पात्रों व विशेष अतिथि का किया बहुमान

महोत्सव के प्रवक्ता प्रदीप जैन बम्होरी ने बताया कि शाम को जिज्ञासा समाधान के दौरान श्री मद् जिनेन्द्र त्रिकाल चौबीस पंच कल्याणक महोत्सव के प्रतिष्ठा चार्य प्रदीप भइया शुयस अशोक नगर का सम्मान किया गया। जिसमें, शॉल, श्रीफल अंग वस्त्र कमेटी की ओर से भेंट किए गए।

आयोजन में मुख्य पात्रों को उपाधियां प्रदान की गई

महोत्सव के मुख्य पात्र जिनेन्द्र जैन ककड़ारी को सवाई सिघई पदवी, विमल जैन मालपीथा रमेश जैन जतारा, राजेश कुमार, राजीव कुमार वर्धमान को भी उपाधि प्रदान की गई।

कार्यक्रम में यह गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति

ललितपुर समाज के अध्यक्ष अनिल अंचल दाऊ,शील चन्द्र अनोरा,राजेन्द्र थनवारा,पंकज पार्षद,अविनाश जैन,टीकमगढ़ विधायक राकेश गिरि,पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष और मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा दयोदय महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेम चंद प्रेमी को सौधर्म इन्द्र बनें। जिनेन्द्र कुमार ककड़ारी,विमल जैन,राजीव वर्धमान, डी.के.जैन,मुरली जैन,लुइस चौधरी गुलाब दाऊ,प्रदीप जैन,बम्होरी अशोक जैन बाबा नायक ने सम्मानित किया।

वक्ता की प्रमाणता से वचनों की प्रमाणता

वक्ता की प्रमाणता से वचनों की प्रमाणता होती है। णमोकार मंत्र की महिमा नहीं है। णमोकार मंत्र पढ़ने वाले की महिमा है। अभिषेक की विशेषता नहीं है। जल भी वही है, भगवान भी वही है लेकिन अभिषेक करने वाले की विशेषता है कि चमत्कार हो जाता है। अभिषेक करने वाले के भव कैसे हैं। वो किस परिणाम से प्रभु के ऊपर कलशा ढाल रहा है वैसी ही विशेषता उस गंधोदक आएगी,जो काम विधि पूर्वक किया जाता है। उसका फल अलग ही होता है। आज भी पूजन में चमत्कार हो सकता है।

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