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इंदौर समवशरण जैन मंदिर में लिफ्ट का लोकार्पण : गांधी की स्मृति में हुई स्थापना, वृद्ध और दिव्यांग श्रद्धालुओं को मिलेगी सुविधा


इंदौर के प्रसिद्ध समवशरण दिगम्बर जैन मंदिर में रविवार को श्रद्धा और सेवा भावना के साथ लिफ्ट का लोकार्पण हुआ। गांधी परिवार ने स्वर्गीय श्री सोहनलालजी गुणमालाजी गांधी की स्मृति में यह लिफ्ट समर्पित कर पुण्यार्जन किया। समारोह में ट्रस्ट के पदाधिकारी और सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…


इंदौर के सुप्रसिद्ध समवशरण दिगम्बर जैन मंदिर में रविवार को लिफ्ट का लोकार्पण समारोह बड़े श्रद्धा भाव से सम्पन्न हुआ। उदासीन श्राविका आश्रम ट्रस्ट की अध्यक्षा श्रीमती पुष्पा प्रदीपकुमार कासलीवाल, ट्रस्टीगण श्री अरुण सेठी, श्री धनराज कासलीवाल, श्री शरद सेठी तथा पुण्यार्जक गांधी परिवार की उपस्थिति में यह कार्यक्रम आयोजित हुआ।

गांधी परिवार ने अपने पूज्य स्वर्गीय श्री सोहनलालजी गुणमालाजी गांधी की स्मृति में यह लिफ्ट स्थापित की। इस अवसर पर परिवार के सदस्य हसमुख-उर्मिला गांधी, रजनीकांत-स्वाति गांधी, अर्पित-अक्षिता, श्रेया, किंजल, दक्ष गांधी, नेहा सुलभ और निशा दोषी उपस्थित रहे और अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।

श्रीमती पुष्पा कासलीवाल ने कहा कि यह लिफ्ट वृद्ध और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए वरदान साबित होगी। उन्होंने कहा कि गांधी परिवार ने अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग कर मंदिर को जो सुविधा दी है, वह अत्यंत प्रेरणादायक है। ट्रस्ट सदस्यों ने भी परिवार के इस कार्य की सराहना की।

श्री हसमुख गांधी ने कहा कि समवशरण मंदिर में शांतिनाथ भगवान की विश्व की सबसे बड़ी स्फटिक मणि प्रतिमा विराजमान है, जिसके दर्शन हेतु देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं। यह मंदिर अब एक तीर्थ स्थल के रूप में विकसित हो रहा है और लिफ्ट सुविधा से श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी।

उदासीन श्राविका आश्रम देश का सबसे बड़ा आश्रम 

समवशरण मंदिर अपनी भव्यता और आध्यात्मिकता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। मंदिर परिसर में स्थित उदासीन श्राविका आश्रम देश का सबसे बड़ा आश्रम है, जहाँ 60 से अधिक ब्रह्मचारिणी बहनें आत्मकल्याण साधना में लीन हैं। जैन जगत के महान विद्वान बाल ब्रह्मचारी पंडित श्री रतनलालजी शास्त्री ने भी यहीं आत्मकल्याणरत रहते हुए समाधि प्राप्त की थी।

लोकार्पण समारोह में उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस सुविधा को मंदिर प्रांगण की एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए गांधी परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया। सभी ने इस पुण्य कार्य को सेवा और समर्पण की मिसाल बताया और कहा कि ऐसी प्रेरणादायक पहलें समाज में धार्मिक भावना को और प्रगाढ़ बनाती हैं।

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