आचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज ससंघ का चातुर्मास पथरिया में चल रहा है। उन्हीं के सानिध्य में मुनिराजों के प्रवचन भी यहां पर नित हो रहे हैं। इन प्रवचनों में धर्म देशना से समाजजनों और गुरु भक्त बड़ी संख्या में लाभ अर्जित कर रहे हैं। पथरिया से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…
पथरिया। आचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज ससंघ का चातुर्मास पथरिया में चल रहा है। उन्हीं के सानिध्य में मुनिराजों के प्रवचन भी यहां पर नित हो रहे हैं। इन प्रवचनों में धर्म देशना से समाजजनों और गुरु भक्त बड़ी संख्या में लाभ अर्जित कर रहे हैं। आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी महाराज ने कहा कि इस संसार में हमें अक्सर ऐसी परिस्थितियां मिलती हैं जहां कोई हमारे साथ अन्याय करता है, बुरा व्यवहार करता है या हमें नीचा दिखाने की कोशिश करता है। ऐसे समय में हमारा स्वभाव हमें तुरंत प्रतिकार करने को प्रेरित करता है लेकिन, याद रखिए कि बुराई का जवाब बुराई से देना, हमें उस जैसे ही बना देता है।
उन्होंने कहा कि महानता तब दिखती है जब हम बुराई का सामना संयम और सद्भाव से करते हैं। महात्मा गांधी ने कहा था कि आंख के बदले आंख पूरी दुनिया को अंधा बना देती है। ‘जब कोई आपको ठेस पहुंचाए तो बदले की भावना को नहीं बल्कि क्षमा की शक्ति को अपनाइए। यह न केवल आपके चरित्र की ऊँचाई को दर्शाता है, बल्कि सामने वाले को भी आत्मचिंतन के लिए विवश करता है। मुनिश्री ने कहा कि संयम वह अग्नि है जो भीतर की अशांति को शांत करती है और सद्भाव वह दीपक है जो अंधकार में भी उजाला फैलाता है। जिस दिन हम दूसरों की बुराई में भी उनका दुःख देखने लगेंगे, उस दिन से हमारे भीतर सच्ची मानवता जागेगी।













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