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पार्श्वोदय तीर्थ के जीर्णोद्धार हेतु सरकार का आश्वासन, श्रमण पावन सागर जी ने स्थगित किया आमरण अनशन : जैन विधायकों और अल्पसंख्यक आयोग की पहल से बेहरोज तीर्थ के अतिक्रमण हटाने पर बनी सहमति


बेहरोज स्थित प्राचीन श्री पार्श्वोदय तीर्थ के जीर्णोद्धार और अतिक्रमण हटाने की मांग पर श्रमण पावन सागर जी महाराज के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन को सरकार ने गंभीरता से लिया। विधायक अशोक कोठारी के माध्यम से सरकार ने आश्वासन दिया, जिसके बाद आमरण अनशन स्थगित कर दिया गया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…


जयपुर। बेहरोज स्थित अतिप्राचीन श्री पार्श्वोदय तीर्थ के जीर्णोद्धार और अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर जैन समुदाय लंबे समय से संघर्षरत था। श्रमण पावन सागर जी महाराज ने इस विषय पर कई बार सरकार को चेतावनी दी और 3 सितम्बर से सचिवालय के बाहर हजारों श्रावक-श्राविकाओं के साथ आमरण अनशन की घोषणा की थी।

इस चेतावनी के बाद राजस्थान सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए भीलवाड़ा विधायक अशोक कुमार कोठारी को वार्ता हेतु भेजा। कोठारी ने महाराज श्री को सरकार की ओर से जीर्णोद्धार की अनुमति और अतिक्रमण हटाने का आश्वासन दिया। इसके बाद महाराज श्री ने समाजहित को देखते हुए आमरण अनशन स्थगित कर दिया।

इस बीच जैन विधायकों—अतुल भंसाली, लादूराम पितलिया, तारा चन्द जैन, प्रताप सिंह सिंघवी, शांति धारीवाल, दीप्ति किरण माहेश्वरी और रोहित बोहरा—ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर तथा फोन पर संवाद कर तीर्थ के संरक्षण की मांग रखी।

प्रतिनिधि मंडल ने मुलाकात की और मांग पत्र सौंपा

अल्पसंख्यक मामलात विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अश्विनी भगत से भी जैन प्रतिनिधि मंडल ने मुलाकात की और मांग पत्र सौंपा। त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्होंने खैरथल-तिजारा जिला कलेक्टर को शीघ्र रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए। वहीं, अल्पसंख्यक आयोग की सचिव नीतू बारूपाल ने भी 15 दिनों में तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश जारी किया।

युवाओं के साथ मिलकर आंदोलन को मजबूती दी

राजस्थान समग्र जैन युवा परिषद के अध्यक्ष जिनेन्द्र जैन और लोकेश जैन ने भी युवाओं के साथ मिलकर आंदोलन को मजबूती दी। परिषद संरक्षक अशोक बांठिया ने सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय न केवल जैन समाज बल्कि समस्त अल्पसंख्यक वर्ग के लिए महत्वपूर्ण है। श्रमण पावन सागर जी महाराज ने युवाओं पर विश्वास जताते हुए कहा कि 12 वर्षों से अटके कार्य अब उनकी जिम्मेदारी पर पूरे होंगे। समाज के व्यापक सहयोग और सरकार की सकारात्मक भूमिका से पार्श्वोदय तीर्थ के पुनरुद्धार का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

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