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जैन रामायण कथा में भक्ति और वैराग्य की गंगा: गुलाबीनगर जयपुर अद्भुत संगम का बना साक्षी 


दिगंबर जैन मुनि श्री जयकीर्ति महाराज इन दिनों गुलाबी नगरी जयपुर में जैन रामकथा का वाचन कर रहे हैं। उन्होंने गुरुवार को कई रोचक प्रसंग सुनाकर आध्यात्मिक गूढ़ रहस्य बताए। इस आयोजन राजस्थान जैन युवा महासभा, दुर्गापुरा जैन मंदिर ट्रस्ट और महिला मंडल ने किया है। आयोजन दिगंबर जैन मंदिर चंद्रप्रभु जी में किया जा रहा है। जयपुर से पढ़िए, प्रीतम लखवाल की यह खबर…


इंदौर/ जयपुर। राजस्थान की राजधानी, गुलाबीनगरी के नाम विख्यात जयपुर इन दिनों आध्यात्मिक चेतना के जागरण के दौर से गुजर रहा है। यहां दिगंबर जैन मुनिश्री जयकीर्ति महाराज जैन रामकथा का वाचन कर रहे हैं। इसको सुनने के लिए बड़ी संख्या में जैन-जैनेत्तर लोग आ रहे हैं। मुनिश्री जयकीर्ति जी महाराज ने कथा के पांचवें दिन रावण-सीता संवाद, सुग्रीव-राम की भेंट,अंजना का वनवास, हनुमान जन्म की भूमिका, बाली मुनिराज पर उपसर्ग आदि प्रसंगों का भावनात्मक चित्रण करते हुए। गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों से पर्दा हटाया। यह जैन रामकथा प्रतिदिन सुबह सवा 8 बजे से सवा 10 बजे चल रही है। इसका समापन 27 मई को होगा। दिगंबर जैन मुनिश्री जयकीर्ति महाराज ने प्रवचन में कहा कि महा पुरुषों का क्रोध भी क्षमा और विनय से शांत हो जाता है। केवल जिन भक्ति से ही निर्वाण संभव है। उन्होंने जैन ग्रंथ पद्मपुराण पर आधारित कथा के माध्यम से बाली मुनिराज की तपस्या, रावण की अहंकार जनित भूलों और पश्चाताप से प्राप्त भक्ति भाव को प्रस्तुत किया।

हनुमान जन्म की कथा सुनाई

राजा श्रेणिक के रूप में शिखरचंद कासलीवाल के पूछे गए सवाल- हनुमान जी का जन्म कैसे हुआ? के उत्तर में मुनि ने पद्मपुराण के आधार पर हनुमान जन्म की कथा का शुभारंभ किया। इस दौरान लक्ष्मणजी का कोटि शिला उठाना, वानरराज सुग्रीव की राम से भेंट और पवनंजय-अंजना विवाह जैसे प्रसंगों ने श्रोताओं को भक्ति की भावनाओं में सराबोर कर दिया।

मुनि के दर्शन को लालयित है श्रद्धालु

शाम को हुई भव्य आरती और भक्ति संध्या में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। प्रसिद्ध भजन गायक सुभाष बज ने पद्मप्रभु चालीसा और अनेक भावनात्मक भजनों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में पूर्व सांसद रामचरण बोहरा, जोधपुर एम्स अध्यक्ष डॉ. एसएस अग्रवाल, प्रो.श्रेयांस सिंघई, राजेंद्र सोगानी, चेतन जैन निमोडिया आदि ने मुनिश्री का आशीर्वाद लिया।

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