भगवान महावीर जयंती के पावन अवसर पर श्री दिगंबर जैन महासमिति, विदर्भ कार्यकारिणी के तत्वावधान में विभागीय कारागृह, अमरावती में कैदियों के लिए निःशुल्क “आरोग्य तपस्वी शिविर” का सफल आयोजन किया गया। पढ़िए प्रशांत जैन की रिपोर्ट…
अमरावती। भगवान महावीर जयंती के पावन अवसर पर श्री दिगंबर जैन महासमिति, विदर्भ कार्यकारिणी के तत्वावधान में विभागीय कारागृह, अमरावती में कैदियों के लिए निःशुल्क “आरोग्य तपस्वी शिविर” का सफल आयोजन किया गया। इस शिविर में कैदियों के स्वास्थ्य परीक्षण के साथ उन्हें सकारात्मक एवं नैतिक जीवन जीने की प्रेरणा भी प्रदान की गई।
स्वास्थ्य के साथ मिला जीवन जीने का संदेश
शिविर के दौरान विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा कैदियों की स्वास्थ्य जांच की गई। साथ ही उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और मानसिक रूप से सुदृढ़ रहने के लिए प्रेरित किया गया। इस पहल का उद्देश्य केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि कैदियों के मानसिक एवं आध्यात्मिक उत्थान को भी बढ़ावा देना रहा। इस अवसर पर विदर्भ उपाध्यक्ष प्रशांत गड़ेकर ने भगवान महावीर के “जियो और जीने दो” सिद्धांत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सजा काट रहे कैदी भी इन महान विचारों को अपनाकर अपने जीवन को सार्थक और सफल बना सकते हैं।
जेल प्रशासन का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान जेलर का सम्मान मोतियों की माला एवं शॉल भेंट कर विदर्भ अध्यक्ष अभिनंदन पेंढारी एवं उनकी टीम द्वारा किया गया।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की रही उपस्थिति
इस आयोजन में किर्तीताई चिंतामणी के मार्गदर्शन में अतिरिक्त अधीक्षक विलास भोईते सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही। प्रमुख रूप से डॉ. संदीप राव (मूलव्याध, फिशर, भगंदर विशेषज्ञ), डॉ. हितेश गुल्हाने (किडनी रोग विशेषज्ञ), डॉ. स्वानंद लुंगे (मधुमेह एवं हृदय रोग विशेषज्ञ), डॉ. जी.बी. चरपे (एमडी), अभिनंदन पेंढारी, महासमिति उपाध्यक्ष उल्हास क्षीरसागर, प्रा. प्रशांत गड़ेकर, शीतल सिंघवी, मनीष नानोटी (एमआर), मंगेश जांभुळकर (फार्मासिस्ट) एवं डॉ. मोहम्मद राजिक उपस्थित रहे। इस शिविर के माध्यम से कैदियों को न केवल स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हुआ, बल्कि उन्हें नैतिक मूल्यों एवं आध्यात्मिक चिंतन की दिशा भी मिली, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की संभावना प्रबल हुई।













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