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माजी विद्यार्थियों का समंतभद्र विद्या मंदिर वेरुल एलोरा में हुआ सम्मान : 700 से अधिक माजी विद्यार्थियों ने एलोरा में एकत्र होकर इस स्वर्णिम क्षण का एहसास किया।


श्री गुरुदेव समंतभद्र विद्या मंदिर वेरुल (एलोरा) की पहचान लेनी एवं भगवान भोलेनाथ का मंदिर 12वें ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर समूचे विश्व में हुई हैं। श्री महावीर ब्रह्मचर्य आश्रय गुरुकुल के माजी विद्यार्थियों का एक दिवसीय स्नेह सम्मेलन पूरे उत्साह के साथ हुआ। इस कार्यक्रम को आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का अशीष मिला था तो आचार्यश्री समयसागरजी ने भी आशीर्वाद प्रदान किया था। एलोरा से पढ़िए, यह खबर…


एलोरा। श्री गुरुदेव समंतभद्र विद्या मंदिर वेरुल (एलोरा) की पहचान लेनी एवं भगवान भोलेनाथ का मंदिर 12वें ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर समूचे विश्व में हुई हैं। श्री महावीर ब्रह्मचर्य आश्रय गुरुकुल के माजी विद्यार्थियों का एक दिवसीय स्नेह सम्मेलन पूरे उत्साह के साथ हुआ। इस कार्यक्रम को आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का अशीष मिला था तो आचार्यश्री समयसागरजी ने भी आशीर्वाद प्रदान किया था। पूरे विश्व से अलग-अलग देश, राज्य प्रांत विभाग, ज़िला में स्थित सात सौ से अधिक माजी विद्यार्थियों ने एलोरा में एकत्र होकर इस स्वर्णिम क्षण का एहसास किया। इस कार्यकम को कई दिगंबर संतों ने आशीर्वाद प्रदान किया तो कार्यक्रम मुनिश्री नियमसागरजी, मुनिश्री सुपार्श्वसागरजी के सान्निध्य में मुख्य अतिथि विभागीय आयुक्त छत्रपति संभाजी नगर जितेंद्र पापड़कर, सतीशजी संघई अध्यक्ष म.ब्र.जैन गुरुकुल करंजा लाड, अध्यक्ष दिनेश गंगवाल, सचिव डॉ. प्रेमचंद पाटनी, स्कूल समिति अध्यक्ष वर्धमान पांडे, मुख्याध्यापक गुलाबचंद बोरालकर, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित गुरुकुल के माजी विद्यार्थी स्कूल के माजी मुख्य अध्यापक निर्मलकुमार ठोले सर के साथ ही वाशिम के पूर्व छात्र प्राचार्य प्रशांत गड़ेकर, प्रा. पंकज बांदे को मंच पर स्थान मिला। इस कार्यक्रम को यशस्वी करने के लिए स्कूल, गुरुकुल के सभी कर्मचारियों ने अथक परिश्रम किया। सन 1962 से लेकर अब तक के सभी माजी विद्यार्थियों का स्नेहसम्मेलन प्रेरणा का विषय बना।

सम्मान पत्र देकर गुरुकुल की पुरानी यादों को समेटा गया

अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गुरुकुल के एक बच्चे को दत्तक लेकर प्रशांत गडेकर ने संकल्पित दान पूर्ति के साथ ही गुरु आज्ञा का पालन किया। इस कार्यक्रम में गुरुकुल के छात्रों के लिये नूतन जैन मंदिर के प्रथम शीला को रखने का मान 1090 बैच के छात्रों को प्राप्त हुआ। स्कूल की ओर से भी उपस्थित माजी छात्रों को मान वंदना देकर विशेष सम्मान किया गया। आने वाले सभी हिमाचल माजी विद्यार्थियों को सम्मान पत्र देकर गुरुकुल, स्कूल की पुरानी यादों को समेटा गया। अब स्कूल को वर्ग में 1 अ दर्जा प्राप्त, आद्यावत डिजिटल स्कूल के साथ भव्य प्ले ग्राउंड के साथ ही नूतन जिन मंदिर के साथ ही सुसज्य स्टेज का निर्माण की अध्यक्ष दिनेश गंगवाल के कलात्मक सोच की प्रशंसा की। साथ ही अध्यक्ष, महामंत्री राम लक्ष्मण की जोड़ी के कारण गुरुकुल, स्कूल का विकास संभव हो पाया। इसकी भी चर्चा रही।

सुनहरी यादों को समेटे एक समाज को प्रेरणा देने वाला आयोजन

इस कार्यक्रम की धार्मिक विधि बाल ब्रह्मचारी मनीष भैया के माध्यम से पूर्ण की गई। अक्षय तृतीया के पावन दिनपर जैन धर्म में दान का अनन्य महत्व विविध माध्यम से दान कर गुरुकुल के सभी छात्रों ने धर्म प्रभावना की। श्याम के भोजन के पश्चात सैकड़ों माजी छात्र जिनकी उम्र लगभग 70/76के ऊपर थी, आंखे नम थी। भाव विभोर होकर अच्छी सुनहरी यादों को समेटे एक समाज को प्रेरणा देने वाला आयोजन स्कूल, गुरुकुल ने कर सबको नवीन ऊर्जा देने का कार्य किया। राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त माझी मुख्याध्यापक के साथ ही गुरुकुल के माजी छात्र प्रशांत गड़ेकर तीन युग का मिलन हुआ। गुरु$शिष्य, मुख्य अध्यापक$विद्यार्थी और दोनों ही गुरुकुल माजी विद्यार्थी एक मंच पर शामिल हुए।

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