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श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर की 12 वर्षीय परीक्षा में उमड़ा उत्साह : ललितपुर में 200 परीक्षार्थियों ने दिया ज्ञान का परिचय


धर्मनगरी ललितपुर में जैन धर्म के गहन अध्ययन और स्वाध्याय की अविरल धारा बह रही है। मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज की पावन प्रेरणा से राजस्थान के सांगानेर (जयपुर) में संचालित श्रमण संस्कृति संस्थान द्वारा आयोजित द्वादशवर्षीय (12 वर्षीय) स्वाध्याय पाठ्यक्रम की परीक्षा हाल ही में उत्साहपूर्वक संपन्न हुई। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर…


ललितपुर। धर्मनगरी ललितपुर में जैन धर्म के गहन अध्ययन और स्वाध्याय की अविरल धारा बह रही है। मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज की पावन प्रेरणा से राजस्थान के सांगानेर (जयपुर) में संचालित श्रमण संस्कृति संस्थान द्वारा आयोजित द्वादशवर्षीय (12 वर्षीय) स्वाध्याय पाठ्यक्रम की परीक्षा हाल ही में उत्साहपूर्वक संपन्न हुई। स्थानीय पार्श्वनाथ जैन अटा मंदिर में आयोजित इस परीक्षा में लगभग 200 परीक्षार्थियों ने सम्मिलित होकर अपनी धार्मिक जिज्ञासा और ज्ञान का प्रदर्शन किया। श्रमण संस्कृति संस्थान बोर्ड द्वारा संचालित यह पाठ्यक्रम उन लोगों के लिए एक वरदान साबित हो रहा है जो घर बैठे जैन धर्म के सिद्धांतों को समझना चाहते हैं। संस्थान द्वारा यूट्यूब और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से शिक्षा दी जा रही है। परीक्षार्थी न केवल स्वाध्याय कर रहे हैं, बल्कि विधिवत परीक्षा देकर अपनी योग्यता का प्रमाण पत्र भी प्राप्त कर रहे हैं।

इन दिग्गजों के मार्गदर्शन में हुई परीक्षा

श्री दिगंबर जैन पंचायत समिति (रजि.) के पदाधिकारियों के कुशल नेतृत्व में इस परीक्षा का सफल आयोजन हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन,कोषाध्यक्ष सौरभ जैन (सीए), संयोजक सनत जैन खजुरिया, प्रबंधक मनोज जैन बबीना एवं अजय जैन गंगचारी, शिक्षामंत्री प्रफुल्ल जैन का सराहनीय योगदान रहा।परीक्षा की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने में परीक्षा प्रभारी आलोक मोदी, राजेश शास्त्री, मुकेश शास्त्री, दिलीप शास्त्री, जितेंद्र जैन राजू और प्रवक्ता राहुल जैन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मिलेगी उच्च शैक्षिक उपाधियाँ

इस 12 वर्षीय पाठ्यक्रम की विशेषता यह है कि इसमें उत्तीर्ण होने वाले छात्रों को उनकी योग्यता के अनुसार सिद्धांत शास्त्री, सिद्धांत विशारद और सिद्धांत आचार्य जैसी प्रतिष्ठित उपाधियों से अलंकृत किया जाएगा। यह पहल जैन समाज में धार्मिक साक्षरता और वैचारिक स्पष्टता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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