यह अत्यंत सौभाग्य और आध्यात्मिक आनंद का अवसर रहा, जब आर्यिका पूर्णमति माताजी ससंघका भव्य मंगल आगमन सुदीप जैन (गुड़गांव) की ऋषिकेश स्थित “थ्रिल फैक्ट्री” में हुआ। अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर…
अंबाह। यह अत्यंत सौभाग्य और आध्यात्मिक आनंद का अवसर रहा, जब आर्यिका पूर्णमति माताजी ससंघ का भव्य मंगल आगमन सुदीप जैन (गुड़गांव) की ऋषिकेश स्थित “थ्रिल फैक्ट्री” में हुआ। पूज्य माताजी के चरण पड़ते ही ऋषिकेश की इस थ्रिल फैक्ट्री का पूरा परिसर भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा। माताजी के आगमन पर अंकुश जैन द्वारा विधि-विधान से उनका भव्य स्वागत एवं आगवानी की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला। दूर-दूर से आए धर्मानुरागी भक्तों ने माताजी के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। पूरा परिसर श्रद्धा और भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। संध्या समय गुरुभक्ति एवं आरती का कार्यक्रम अत्यंत भावपूर्ण रहा। भक्ति गीतों और आरती की मधुर ध्वनि से वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर गुरु मां के सानिध्य का आनंद लेते दिखाई दिए। इस दौरान उपस्थित जनसमूह के चेहरों पर आस्था, शांति और आनंद का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।
मनुष्य जीवन का सच्चा उद्देश्य आत्मा की शुद्धि
इस अवसर पर आर्यिका पूर्णमति माताजी ने अपने प्रेरणादायक प्रवचनों में कहा कि “मनुष्य जीवन का सच्चा उद्देश्य आत्मा की शुद्धि और धर्म के मार्ग पर चलना है। सांसारिक मोह-माया में उलझकर हम अपने वास्तविक स्वरूप को भूल जाते हैं। संयम, साधना और सेवा के माध्यम से ही जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है।” उनके इन वचनों ने श्रद्धालुओं को गहराई से प्रभावित किया और जीवन में धर्म का महत्व समझाया।
आर्यिका संघ का मंगल विहार हुआ
आयोजन के मेजबान सुदीप जैन ने बताया कि पूज्य माताजी का हमारे यहां आगमन होना हमारे लिए अत्यंत सौभाग्य की बात है। उनके चरणों से ऋषिकेश स्थित इस थ्रिल फैक्ट्री का स्थान पावन हो गया है और हमारे स्टाफ को उनके सानिध्य का अमूल्य अवसर प्राप्त हुआ है। रात्रि विश्राम के पश्चात अगले दिन प्रातः साढ़े 7 बजे आर्यिका संघ का मंगल विहार हुआ। श्रद्धालुओं ने भावभीनी विदाई देते हुए पुनः आगमन की कामना की। इस दौरान सभी धर्मानुरागी बंधुओं के लिए वात्सल्य भोज की विशेष व्यवस्था की गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
हृदय में गहरी छाप छोड़ी
अंकुश जैन ने बताया कि पूजनीया माताजी के चरणों का स्पर्श पाकर ऋषिकेश की “थ्रिल फैक्ट्री” वास्तव में धन्य हो गई। आर्यिका संघ का यह आगमन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि दिव्यता, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अद्भुत संगम बन गया, जिसने प्रत्येक श्रद्धालु के हृदय में गहरी छाप छोड़ी।













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