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ढिमरौली घाट बना आस्था का प्रतीक : आचार्य श्री विद्यासागर के पदचिह्नों से प्रेरणा, बेतवा नदी में मछली पकड़ने पर स्थायी प्रतिबंध 


अशोकनगर जिले के मुंगावली विकासखंड स्थित ढिमरौली गांव की बेतवा नदी पर मछली पकड़ने पर अब पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह निर्णय ग्राम पंचायत सोनाखेड़ी द्वारा पारित प्रस्ताव के आधार पर जनपद पंचायत और जिला पंचायत सीईओ राजेश जैन ने गुरुवार को आदेश जारी कर लागू किया। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…   


गुना। अशोकनगर जिले के मुंगावली विकासखंड स्थित ढिमरौली गांव की बेतवा नदी पर मछली पकड़ने पर अब पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह निर्णय ग्राम पंचायत सोनाखेड़ी द्वारा पारित प्रस्ताव के आधार पर जनपद पंचायत और जिला पंचायत सीईओ राजेश जैन ने गुरुवार को आदेश जारी कर लागू किया। यह प्रतिबंध उस ऐतिहासिक घटना से प्रेरित है जब 4 दिसंबर 2018 को दिगंबर जैन परंपरा के संत आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने उत्तर प्रदेश के देवगढ़ से पदविहार करते हुए पहली बार किसी नाव की सहायता से बेतवा नदी पार की थी। किश्ती घाट से नदी पार करते समय आचार्य श्री ने जिस नाव का उपयोग किया, वह ढिमरौली गांव के निवासियों के लिए धार्मिक और आध्यात्मिक प्रेरणा का केंद्र बन गया। इस घटना का इतना गहरा प्रभाव पड़ा कि उस समय घाट पर मछली पकड़ने का 14 करोड़ रुपये का ठेका लिए रंजीत सिंह सिकरवार नामक ठेकेदार ने न केवल यह ठेका त्याग दिया, बल्कि जीवनभर के लिए मांसाहार और इस व्यवसाय से भी दूरी बना ली। सीईओ और एसडीएम मुंगावली की रिपोर्ट में भी घाट पर धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनाओं का उल्लेख करते हुए प्रतिबंध को उचित ठहराया गया। अब घाट को धार्मिक स्थल के रूप में संरक्षित किया जाएगा और नदी में मछली पकड़ना पूरी तरह निषिद्ध रहेगा।

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