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स्वाध्याय, अनुशासन, आरोग्यता और पर्यावरण रक्षा को बताया जीवन का सच्चा धन ; देव, शास्त्र, गुरु, धर्म और मंदिर की रक्षा शक्ति अनुसार करें धार्मिक कार्य – आचार्य वर्धमान सागर जी


टोंक में धर्मसभा के दौरान आचार्य वर्धमान सागर जी ने आरोग्यता, शास्त्र स्वाध्याय, अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण पर गहन विचार रखे। जीवन में संयम और धार्मिकता से ही आत्मकल्याण संभव है। पढ़िए राजेश पंचोलिया की पूरी रिपोर्ट…


टोंक में आयोजित धर्मसभा में पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने धर्म, अनुशासन, स्वास्थ्य, पर्यावरण और स्वाध्याय पर आधारित विस्तृत उपदेश प्रदान किए। आपने कहा कि सभी धन प्राप्त करना चाहते हैं, लेकिन धन का उपयोग धार्मिक कार्यों में भी होना चाहिए। उन्होंने आरोग्यता को एक विशेष प्रकार का धन बताया और कहा कि दूषित खानपान व कषाय-इंद्रिय भोगों से आत्मा और शरीर रोगी होते हैं।

राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने बताया कि सज्जनों की मित्रता, विद्वत्ता और स्वाध्याय ही वास्तविक पूंजी हैं। शास्त्रों का अध्ययन और जीवन में उसका आत्मसात करना अनिवार्य है। जैसे अखबार पढ़ने में रुचि रखते हैं, वैसे ही शास्त्र स्वाध्याय में भी तन्मयता होनी चाहिए।

स्वच्छंदता सामाजिक, पारिवारिक और धार्मिक दृष्टि से घातक

आचार्य श्री ने स्वाधीनता को भी आत्मा का धन बताते हुए कहा कि स्वच्छंदता सामाजिक, पारिवारिक और धार्मिक दृष्टि से घातक है। लज्जा और अनुशासन से ही परिवार और समाज सुखी बनते हैं। आपने “लाज से काज ठीक होता है” सूत्र बताते हुए कहा कि धर्म, देव, गुरु के प्रति सभी को लज्जा रखनी चाहिए।

पर्यावरण संरक्षण पर बोलते हुए आपने वृक्षारोपण को जीवनदायी बताया और कहा कि पृथ्वी व जल का अत्यधिक दोहन गलत है। वृक्षारोपण से वातावरण शुद्ध होता है। आचार्य श्री ने सभी को देव, शास्त्र, गुरु, धर्म और मंदिर क्षेत्रों की रक्षा शक्ति अनुसार तन, मन, धन से सेवा का संकल्प दिलाया।

आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की

प्रवचन से पूर्व आर्यिका श्री विन्रममति माताजी ने कहा कि जिनेन्द्र भक्ति से कर्मों का नाश होता है और परमेष्ठियों की पूजा से पुण्य प्राप्त होता है। आज संघ सानिध्य में वृक्षारोपण कार्य की शुरुआत हुई। समाज प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार के अनुसार श्री आदिनाथ भगवान और प्रथमाचार्य शांतिसागर जी सहित पूर्वाचार्यों के चित्रों का अनावरण कर दीप प्रज्वलन किया गया। भक्तों ने आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की और भक्ति नृत्य के साथ पूजन किया। 6 अगस्त को आचार्य श्री की आहार चर्या का सौभाग्य विजय नगर के राजेंद्र छोटू भैया को प्राप्त हुआ। अग्रवाल धर्मशाला में टोंक, निवाई, सनावद, इंदौर सहित अन्य नगरों से श्रद्धालु चौके लगा रहे हैं।

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