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आर्यिका मां अकम्पमति माताजी का चातुर्मासिक प्रवचन : पूजा विधि विधान से हमारे भावों की शुद्धि होती है


महिला जैन मिलन क्षेत्र क्रमांक 10 नेहानगर ने समोशरण महामंडल विधान के लिए द्रव्य भेंट की। आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की शिष्या आर्यिका मां अकम्पमति माताजी ससंघ का चातुर्मास श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर नेहानगर में धर्म प्रभावना पूर्वक चल रहा है। पढ़िए मनीष विद्यार्थी सागर की रिपोर्ट…


सागर। महिला जैन मिलन क्षेत्र क्रमांक 10 नेहानगर ने समोशरण महामंडल विधान के लिए द्रव्य भेंट की। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका मां अकम्पमति माताजी ससंघ का चातुर्मास श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर नेहानगर में धर्म प्रभावना पूर्वक चल रहा है। उसी दौरान आर्यिका श्री के मंगल सान्निध्य में ब्र. संजीव भैया कटंगी के निर्देशन में श्री 1008 समवशरण महामंडल विधान का आयोजन सकल दिगंबर जैन समाज नेहानगर के द्वारा किया गया जिसमें महिला जैन मिलन नेहानगर की वीरांगनाओं द्वारा द्रव्य के थाल सजाकर द्रव्य समोशरण विधान के लिए द्रव्य भेंट की। इस विधान में वीरांगनाओं ने विधान सहभागिता कर पुण्य अर्जित किया और भक्ति भाव से प्रभु की आराधना की।

आर्यिका श्री ने आचार्य श्री के जीवन के बहुत से संस्मरण सुनाए और आचार्य श्री रचित मूक माटी ग्रंथ के बारे में बताया। माताजी ने बताया की विधान पूजन में जो भी श्रावक बैठते हैं उनके जीवन में विशुद्धी आती है। शुभ कर्मों का संचय होता है इसलिए सभी को पूजन- विधान में शामिल होना चाहिए। प्रतिदिन हमारे द्वारा जाने-अनजाने में पाप संचय होता है तो इसका नष्ट करने के लिए, शुभ कर्म करना जरूरी है। जैसे हम पूजन विधि – विधान षट् आवश्यक के द्वारा हमें सही दिशा प्राप्त हो सकती है।

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