श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ भगवान का जन्मकल्याणक महोत्सव भक्ति भाव के साथ मनाया। प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ जी के मस्तकाभिषेक व स्वर्ण कलश से करने का सौभाग्य सुनील नवलचंद धनोते को सर्वाधिक बोली लगाकर मिला। पढ़िए दीपक प्रधान की यह रिपोर्ट…
धांमनोद। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ भगवान का जन्मकल्याणक महोत्सव भक्ति भाव के साथ मनाया। प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ जी के मस्तकाभिषेक व स्वर्ण कलश से करने का सौभाग्य सुनील नवलचंद धनोते को सर्वाधिक बोली लगाकर मिला। राजेश जैन और पीयूष जैन ने बताया कि सभी इन्द्रों ने भी स्वर्ण कलश चढ़ाकर कर पुण्य संचय किया।
सबसे पहले 24 तीर्थंकर भगवन्तों की धातु की प्रतिमाजी को सौधर्म इंद्र अशोक प्रधान ने मस्तक पर रहकर एक परिक्रमा लगाई। जब महिलाएं भगवान के जन्म की विनतियां बोलकर भावनाएं भा रही थीं, तब भगवान को पांडुक शिला पर विराजमान कर सभी इन्द्रों ने अभिषेक किया। इसके बाद महाअर्घ्य चढ़ाए गए। बालक आदिनाथ को पालने में बैठाकर झूला झुलाया गया।













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