अयोध्या में त्रिदिवसीय राष्ट्रीय जैन विद्वत सम्मेलन का शुभारंभ हुआ, जिसमें देशभर से 200 से अधिक विद्वानों ने भाग लिया। ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में षट्खंडागम ग्रंथ पर गहन चर्चा हुई। — पढ़िए अभिषेक पाटिल की यह विशेष रिपोर्ट
श्री दिगंबर जैन रायगंज मंदिर, अयोध्या में त्रिदिवसीय राष्ट्रीय जैन विद्वत सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। यह आयोजन गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में आयोजित किया गया।
दीप प्रज्ज्वलन से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मुनि श्री विभास्वतरसागर जी, शुद्धोपयोगसागर जी, श्रमसागर जी सहित अन्य संतों एवं अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। मंगलाचरण श्रीमती ऊषा पाटनी (इंदौर) ने प्रस्तुत किया।
विद्वानों की प्रभावशाली उपस्थिति
सम्मेलन की अध्यक्षता प्रो. अभय कुमार जैन (लखनऊ) ने की, जबकि मुख्य अतिथि प्रो. प्रदीप कुमार जैन (NIT पटना) और सारस्वत अतिथि सुरेशचंद जैन (IAS, भोपाल) रहे। संचालन डॉ. संजीव सर्राफ (BHU) द्वारा किया गया।
षट्खंडागम पर विशेष चर्चा
प्रो. अनुपम जैन (इंदौर) ने षट्खंडागम द्विसहस्राब्दी महोत्सव पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह जैन आगम का पहला लिपिबद्ध ग्रंथ है, जिसे आचार्य पुष्पदंत और भूतबलि ने लिखा।
ज्ञानमती माताजी का विशेष उद्बोधन
ज्ञानमती माताजी ने षट्खंडागम ग्रंथ के महत्व को बताते हुए कहा कि यह अत्यंत चमत्कारी और अतिशयकारी ग्रंथ है। उन्होंने इसकी प्राकृत से संस्कृत में टीका कर लगभग 3500 पृष्ठों में विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत की, जो जैन समाज के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
देशभर से पहुंचे विद्वान
महामंत्री विजय कुमार जैन ने बताया कि इस तीन दिवसीय सम्मेलन में देशभर से 200 से अधिक विद्वान भाग ले रहे हैं, जो विभिन्न सत्रों में अपने विचार रखेंगे।
कुशल संचालन और मार्गदर्शन
कार्यक्रम स्वस्तिश्री रविन्द्रकीर्ति स्वामी जी के नेतृत्व एवं आर्यिका चंदनामती माताजी के मार्गदर्शन में संपन्न हो रहा है। दोपहर सत्र में भी विद्वानों ने षट्खंडागम और सिद्धांत चिंतामणि पर अपने विचार प्रस्तुत किए।













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