आर्यिका विदक्षाश्री माताजी के पावन हस्तकमलों से शकुंतला बकलीवाल ने सोमवार को जैनैश्वरी आर्यिका दीक्षा अंगीकार कर नव मंगल नाम आर्यिका विहार श्री माताजी प्राप्त किया और उत्तम समाधि मरण को अंगीकार किया। इंदौरसे पढ़िए, यह खबर…
इंदौर। आज का यह अविस्मरणीय दिवस जैन समाज तथा समस्त जैन संघ के लिए परम मंगलमय बन गया है। गणाचार्य श्री विरागसागरजी महाराज की शिष्या एवं पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज की आज्ञानुवर्ती शिष्या आर्यिका विदक्षाश्री माताजी के पावन हस्तकमलों से शकुंतला बकलीवाल ने सोमवार को जैनैश्वरी आर्यिका दीक्षा अंगीकार कर नव मंगल नाम आर्यिका विहार श्री माताजी प्राप्त किया और उत्तम समाधि मरण को अंगीकार किया। यह मंगल दीक्षा आर्यिका विदक्षाश्री माताजी के पावन सान्निध्य तथा पट्टाधीश आचार्य श्री सुनीलसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सम्बुद्धसागरजी महाराज एवं मुनि श्री सुविशुद्ध सागरजी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति में भव्यता से हुई। यह क्षण केवल एक संस्कार नहीं, बल्कि आत्म जागरण, वैराग्य और मोक्षमार्ग की ओर दिव्य प्रस्थान है। तप, त्याग और संयम से आलोकित यह पवित्र जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा और पथ प्रदर्शन का स्रोत बने। यही हृदय से मंगलकामना। आर्यिका विहारश्री माताजी का डोला सोमवार को अपरान्ह 3 बजे श्री पंचबाल्यती जिनालय अंजनी नगर से मलयगिरी ले जाया गया।













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