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अपनी सभ्यता, संस्कृति, संस्कार मत छोड़िएः आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज

  • भट्टराक यशकीर्ति विद्यालय में विद्यार्थियों को संबोधन

न्यूज सौजन्य- कुणाल जैन

प्रतापगढ़। आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने भट्टराक यशकीर्ति विद्यालय में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा है कि आज ये तिरंगा सम्मान से है। कल ये झंडा जमीन पर मिले तो सोचना कि 135 करोड़ लोगों का सम्मान जमीन पर है। आजादी ऐसे ही नहीं मिली है। जरा सोचिए, भारत माता की जय बोलने से ही जब खून गरम हो जाता है, तो जो लोग शहदी हुए हैं, उनका खून कितना गर्म रहा होगा। जान देने वालों ने अपनी जान देकर आजादी दी, आप तो मान-सम्मान देश को दें, यही बहुत है। आज अनेक धर्मों में लोग अपनी ही वाहवाही कर रहे हैं. कोई यह नहीं कहता कि मैं भारतीय हूं। भारत माता की जय बोलने में भी परेशानी हो रही है। तिरंगे को सलाम करिए, शहीदों को सलाम करिए, दिल से करिए। 1947 में आजादी मिली। आजादी तो भारतीय को मिली है। भारत देश तो अनादिकाल से आजाद था। यहां के रहने वाले गुलाम बने। अंग्रेजों ने देखा कि यहां रहने वाले एक नहीं हैं। यहां के राजाओं को लड़ाकर खुद शासन करने लगे। अनेक शहीद हुए हैं जो तलवार चलाना भी जानते हैं और तलवार से झुकाना भी।
आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने आगे कहा कि महात्मा गांधी ने भाई-भाई का नारा लगाया, बिना बंदूक के लड़ाई लड़ी। भाईचार बनाया तो आजादी मिली। अंग्रेज चले गए, पर लोगों के दिलों में अंग्रेजी छोड़ गए। गुलाम थे तो आपास में प्रेम था। आजाद हुए तो आपस का प्रेम कत्म, सभ्यता, संस्कृति खत्म। आज पूरा भारत एक हो जाए, सारे संप्रदाय एक हो जाएं तो पूरे विश्व में भारत फिर शिखर पर होगा।

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