इंदौर के वैभव नगर जैन मंदिर में अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज का 11वां दीक्षा समारोह महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। मुनि श्री ने शिक्षा अभियान और आत्मशुद्धि का संदेश दिया।
इंदौर। धर्म और अध्यात्म की पावन धरा वैभव नगर जैन मंदिर इंदौर पर आज अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज का 11वां दीक्षा समारोह महोत्सव पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। शुक्रवार सुबह 7:30 बजे से आयोजित इस भव्य समारोह में गुरु भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला, जहाँ वैभव नगर, कालानीनगर, कनाड़िया, उदयनगर, ग्रेटर बाबा, परिवहन नगर, गोयल नगर, मानवता नगर, गोकुल नगर सहित इंदौर नगर की विभिन्न कॉलोनियों से आए श्रद्धालुओं ने मुनि श्री के चरणों में अपनी विनयांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का संचालन रेखा संजय जैन और श्रीपाल जैन द्वारा किया गया ।
शिक्षा के क्षेत्र में नए अभियान की घोषणा इस अवसर पर अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज ने श्रीफल गौरव दिवस के तहत नए अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि अब शिक्षा के क्षेत्र में काम किया जाएगा। एक अभियान के माध्यम से 300 से अधिक लोगों को जोड़ा जाएगा, उससे जो राशि एकत्रित की जाएगी उसका उपयोग दिगंबर जैन समाज के उन बच्चों की शिक्षा पर खर्च किया जाएगा, जिनके माता-पिता उन्हें उच्च शिक्षा दिलवाना चाहते हैं लेकिन आगे की पढ़ाई के लिए सक्षम नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि यही बच्चे आगे चलकर समाज की हर समस्या और हर जरूरत का समाधान आईएएस, आईपीएस, सीए आदि बनकर कर सकेंगे।

समाजजनों ने दिया सहयोग का आश्वासन
इस अवसर पर संदीप जैन मोयरा ने कहा कि वे इस अभियान में तन, मन और धन से पूर्ण सहयोग देने के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे। कार्यक्रम में वैभवनगर दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीपाल जैन, पूर्व अध्यक्ष विनोद जैन आदि ने भी संबोधित किया।

दीक्षा दिवस की स्मृतियों को किया ताजा
इस मौके पर अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज ने अपने दीक्षा समारोह की यादों को ताजा करते हुए गुरुदेव आचार्य श्री अभिनंदनसागर जी, श्री श्रवणबेलगोला के भट्टारक श्री चारुकीर्ति स्वामी, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज और आर्यिका वर्धित मति माता जी आदि के सानिध्य से मिले ज्ञान, तप और साधना के सूत्रों के बारे में विस्तार से बताया।

पाद प्रक्षालन का सौभाग्य प्राप्त किया
मुनि श्री का प्रथम पाद प्रक्षालन संदीप सुनीता जैन मोयरा सरिया ,जितेंद्र मोनिका जैन ने किया। दूसरे पुण्यार्जक श्रेष्ठी जैन, संदीप मादावत, दिलीप रीता वैद्य, अनिल आभा जैन सहित अनेक जनों ने पाद प्रक्षालन कर पुण्य अर्जित किया।

शास्त्र भेंट करने की लगी होड़
मुनि श्री को प्रमोद आभा जैन, अर्चना जैन, एस.के. जैन, संदीप अर्चना मादावत, आरोहण परिवार, इंद्र कुमार कामना जैन, शिल्पा पीयूष गांधी ने शास्त्र भेंट किया। इनके साथ ही समाज की महिलाओं और पुरुषों में भी शास्त्र भेंट करने की होड़ लगी रही।

संगीत के साथ अष्ट द्रव्य पूजन
समाज के अनेक संगठनों द्वारा अष्ट द्रव्य में संगीत के साथ पूजन कराया गया। भजन गायक अंश जैन ने संगीतमय पूजा करवाई, जिसमें समाज के महिला-पुरुषों ने अर्घ्य समर्पित किए। मंत्रोच्चार की गूंज से पूरा परिसर गुंजायमान रहा।

गुरु वंदना और चित्र अनावरण से हुई शुरुआत
महोत्सव का शुभारंभ मंगलाचरण और गुरु वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर दीक्षा गुरु आचार्य श्री अभिनंदनसागर जी महाराज के चित्र का अनावरण और दीप प्रज्ज्वलन अतिथियों और समाजबंधुओं ने किया। उपस्थित जनसमूह ने गुरुदेव अभिनंदनसागर जी का भावपूर्ण गुणानुवाद किया, जिसमें उनके द्वारा दी गई शिक्षाओं और उनके संयमित जीवन के प्रसंगों को याद किया गया।

कार्यक्रम के दौरान आचार्य श्री पट्टाचार्य वर्धमान सागर जी महाराज का भी विशेष स्मरण किया गया, जिनकी छत्रछाया में धर्म की प्रभावना निरंतर बढ़ रही है।
इससे पूर्व मंगलाचरण नन्हीं बालिका नेहल और निरल जैन ने नृत्य गीत के माध्यम से प्रस्तुत किया। इस अवसर पर समाज जनों ने दीप प्रज्वलन किया।

बड़ी संख्या में समाजजन रहे उपस्थित
कार्यक्रम में अमित कासलीवाल, पुष्पा कासलीवाल, कमलेश कासलीवाल, मनोहर झांझरी, संदीप सुनीता जैन मोयरा सरिया, तल्लीन बड़जात्या, रितेश पाटनी, अनूप गांधी, वितुल अजमेरा,पवन पाटोदी श्रेष्ठी जैन, श्रीपाल जैन, विनोद जैन, सुदर्शन जटाले, कैलाश वेद, दिलीप प्रमिला पाटनी, संदीप मादावत, अशोक पालविया, नितेश जैन,पी सी जैन, एस.के .जैन संजय पापड़ीवाल,रोहित जैन,वर्णित जैन,अंकुरि जैन,पिंकी कासलीवाल,निधि जैन,कमलेश जैन,महिला मंडल अध्यक्ष अर्चना मादावत,गुरुदेव के गृहग्राम से पधारे उनके भ्राता दीपक जैन परिवार सहित,ट्रस्ट के ट्रस्टी , महिला मंडल, आरोहण ग्रुप, रत्नत्रय ग्रुप के सदस्य आदि मौजूद रहे।
कार्यक्रम का संचालन श्रीफल जैन न्यूज़ की संपादक रेखा संजय जैन एवं श्रीपाल जैन ने किया।

मन और कर्म की शुद्धता ही मोक्ष का मार्ग: मुनि श्री पूज्यसागर
मार्मिक और दार्शनिक उद्बोधन
समारोह में उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज ने बहुत ही मार्मिक और दार्शनिक उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि “अतिशय (चमत्कार) अपने आप नहीं होते, बल्कि वे हमारी साधना और पुरुषार्थ से किए जाते हैं।”

जीवन में तीन शुद्धियों पर दिया विशेष बल
1. मन की शुद्धता:
जब तक मन कलुषित है, क्रियाएं फलदाई नहीं होतीं।
2. कर्म की शुद्धता:
हम जो भी कार्य करें, वह निस्वार्थ भाव और धर्म की मर्यादा में रहकर होना चाहिए।
3. देश और धर्म के प्रति कर्तव्य:
व्यक्ति को अपने आत्म-कल्याण के साथ-साथ देश और धर्म के उत्थान के लिए भी समर्पित रहना चाहिए।

कर्म सिद्धांत पर गंभीर चिंतन
कर्मों की निर्जरा पर प्रकाश डालते हुए मुनि श्री ने एक विशेष तथ्य रखा कि केवल ज्ञान की प्राप्ति के बाद भी तुरंत मोक्ष नहीं होता, उसके लिए भी शेष अघाती कर्मों का क्षय होना अनिवार्य है।
उन्होंने समझाया कि शुभ कर्म ही जीव को संसार के दुखों से निकालकर शुद्धि की ओर ले जाते हैं। मुनि श्री के अनुसार, “कर्मों की शुद्धता ही आत्मा का वास्तविक श्रृंगार है। यदि हमारे कर्म पवित्र हैं, तो परिणाम भी सुखद होंगे।”
भक्तों का उमड़ा सैलाब
दीक्षा दिवस के इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने मुनि श्री की संगीतमय आरती उतारी और उनके संयम पथ की सराहना की। समाज के गणमान्य नागरिकों ने मुनि श्री को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे पंडाल में ‘गुरुदेव की जय-जयकार’ के स्वर गूंजते रहे।
आत्ममंथन का बना अवसर
यह आयोजन श्री पद्मप्रभु दिगंबर जैन मंदिर परिसर वैभव नगर में किया गया। यह 11वां दीक्षा महोत्सव न केवल एक उत्सव था, बल्कि आत्ममंथन का एक अवसर भी बना, जहाँ लोगों ने अपने जीवन को संयम, सादगी और धर्ममय मार्ग की ओर ले जाने का संकल्प लिया।













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