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आगरा के छीपीटोला में इतिहास का साक्षी बना जनसैलाब : उपाध्याय पदारोहण और जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव ने रचा नया अध्याय


आगरा के पार्श्वधाम दिगम्बर जैन मंदिर, छीपीटोला में वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज के सानिध्य में उपाध्याय पदारोहण एवं जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव ऐतिहासिक श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। हजारों श्रद्धालु इस अविस्मरणीय आयोजन के साक्षी बने पढ़िए श्रीफल साथी शुभम जैन की यह रिपोर्ट।


आगरा। पार्श्वधाम दिगम्बर जैन मंदिर, छीपीटोला में सोमवार को



आयोजित उपाध्याय पदारोहण दिवस एवं भव्य जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव ने धार्मिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज एवं समस्त मुनिसंघ के मंगल सानिध्य में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे परिसर को आस्था और भक्ति से सराबोर कर दिया।

भव्य शोभायात्रा से हुआ शुभारंभ

प्रातःकाल जैन भवन से पार्श्वधाम तक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। बैंड-बाजों, धार्मिक ध्वजों, भक्ति गीतों और जयघोषों के बीच निकली शोभायात्रा का जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से पूरा छीपीटोला क्षेत्र धर्ममय वातावरण में रंग गया।

उपाध्याय पद से अलंकृत हुए मुनिश्री शिवदत्तसागर जी

महोत्सव के दौरान निर्यापक मुनिश्री शिवदत्तसागर जी महाराज को आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने वैदिक एवं जैन परंपरा के मंत्रोच्चार के साथ उपाध्याय पद से विभूषित किया। जैसे ही उपाध्याय पद की घोषणा हुई, पूरा पंडाल जयघोषों से गूंज उठा और श्रद्धालुओं ने खड़े होकर भावभीनी वंदना की।

ब्रह्मचारी मोहनलाल भैया ने ग्रहण की मुनि दीक्षा

समारोह का सबसे भावुक क्षण तब आया जब कोटा निवासी ब्रह्मचारी मोहनलाल भैया ने सांसारिक जीवन का त्याग कर जैनेश्वरी मुनि दीक्षा ग्रहण की। आचार्यश्री ने केशलोंच कर उन्हें मुनिश्री वासुदत्तसागर जी महाराज नाम प्रदान किया। दीक्षा के उपरांत परिजनों ने कमंडल एवं पिच्छी भेंट कर भावपूर्ण विदाई दी।

चातुर्मास एवं मंगल प्रवास का हुआ विनय निवेदन

महोत्सव में फिरोजाबाद, अलीगढ़ एवं आगरा की जैन समाज द्वारा वर्ष 2026 के चातुर्मास एवं मंगल प्रवास हेतु आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज के समक्ष श्रीफल भेंट कर विनय निवेदन किया गया तथा मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।

देशभर से उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

आगरा, फिरोजाबाद, टूंडला, शिकोहाबाद, इटावा, बरहन, जलेसर, कोटा, दिल्ली, सागर, अशोक नगर सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु महोत्सव में शामिल हुए। मंदिर समिति द्वारा सभी अतिथियों का तिलक एवं दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया गया।

धर्म, संयम और संस्कार का संदेश

संतों ने अपने प्रवचनों में धर्म, संयम, तप, आत्मकल्याण और सदाचार का संदेश देते हुए समाज को आध्यात्मिक जीवन अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में मंदिर समिति, महोत्सव समिति, एनसीसी क्लब छीपीटोला एवं युवा कार्यकर्ताओं की उल्लेखनीय भूमिका रही।

समापन एवं आभार

कार्यक्रम का संचालन मनोज जैन बाकलीवाल ने किया। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, श्रद्धालुओं, समाजबंधुओं एवं मीडिया प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए इसे धर्म, त्याग, तप और समाज की एकता का ऐतिहासिक महोत्सव बताया

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