समाचार

अभिनन्दन साधना केन्द्र, शेषपुर में हुआ आयोजन : भगवान आदिनाथ निर्वाण महोत्सव व आचार्य अभिनन्दन सागरजी महाराज का समाधि महोत्सव मनाया 


बीसवीं सदी के प्रथम दिगम्बर जैनाचार्य शान्तिसागरजी महाराज की परम्परा के पट्टाचार्य वागड़- मेवाड़ गौरव समाधिस्थ आचार्य अभिनन्दन सागर जी महाराज का नवम समाधि महोत्सव सकल बीसा नरसिंहपुरा समाज के संयोजन में एवं मुनि आज्ञा सागरजी महाराज, आर्यिका सुप्रज्ञमति माताजी, क्षुल्लक सुपर्व सागर जी के सानिध्य में तथा प्रतिष्ठाचार्य विनोद पगारिया विरल सागवाड़ा के निर्देशन में गुरुवार को समाधि स्थल आसपुर के समीपस्थ अभिनन्दन साधना केन्द्र में श्रद्धा व उमंग के साथ मनाया गया। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


सागवाड़ा। बीसवीं सदी के प्रथम दिगम्बर जैनाचार्य शान्तिसागरजी महाराज की परम्परा के पट्टाचार्य वागड़- मेवाड़ गौरव समाधिस्थ आचार्य अभिनन्दन सागर जी महाराज का नवम समाधि महोत्सव सकल बीसा नरसिंहपुरा समाज के संयोजन में एवं मुनि आज्ञा सागरजी महाराज, आर्यिका सुप्रज्ञमति माताजी, क्षुल्लक सुपर्व सागर जी के सानिध्य में तथा प्रतिष्ठाचार्य विनोद पगारिया विरल सागवाड़ा के निर्देशन में गुरुवार को समाधि स्थल आसपुर के समीपस्थ अभिनन्दन साधना केन्द्र में श्रद्धा व उमंग के साथ मनाया गया। इस अवसर पर अनेक श्रद्धालु व गुरु भक्त मौजूद थे।

निर्वाण लाडू चढ़ाया

अभिनन्दन साधना केन्द्र ट्रस्ट मण्डल के अध्यक्ष मोहनलाल विरदावत ने बताया कि इस अवसर पर गुरुवार को प्रातः देव आज्ञा, गुरु आज्ञा के बाद नरेन्द्र कुमार, गजेन्द्र कुमार संघवी ईन्टाली खेडा द्वारा ध्वजारोहण किया गया। उसके बाद मोहनलाल कचरावत करावली द्वारा मण्डप उद्घाटन किया गया। प्रतिष्ठाचार्य पगारिया द्वारा सकलीकरण, इन्द्र प्रतिष्ठा, मंडप प्रतिष्ठा, पंच मंगल कलश स्थापना क्रिया कराई गई। इसके पश्चात सौधर्म इन्द्र मोहनलाल विरदावत व सावन खोड़निया द्वारा आदिनाथ भगवान का अभिषेक व शान्तिधारा की गई। नवदेवता पूजा के बाद प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक अवसर पर क्षेत्र पर निर्मित आदिनाथ भगवान के निर्वाण स्थल की प्रतिकृति कैलाश पर्वत पर निर्वाण का प्रतीक निर्वाण लाडू रमेश विरदावत बनकोडा द्वारा चढ़ाया गया। कार्यक्रम में मुनि आज्ञासागरजी के मंत्र उच्चारण के साथ इन्द्र-इन्द्राणियों के समूह द्वारा आचार्य अभिनन्दन सागर आचार्य छत्तीसी विधान मण्डल पर अष्ट द्रव्य श्रीफल युक्त अर्घ्य समर्पित किये गए।

नहीं चुका सकते गुरु उपकार

इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि आज्ञासागर जी महाराज ने कहा कि आचार्य अभिनन्दन सागरजी महाराज वागड़-मेवाड़ की शान थे। उन्होंने इस समूचे क्षेत्र में धर्म प्रभावना के साथ संस्कारों का बीजारोपण किया था। वे सरलता, सौम्यता तथा सादगी की प्रतिमूर्ति थे। मैं सौभाग्यशाली हूं जो ऐसे गुरु का शिष्य बनकर उनके चरणों मे रहकर सीखने का, सेवा का अवसर मिला। गुरु उपकार का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता। आज्ञा सागरजी महाराज का पाद प्रक्षालन मगनलाल करमेरा झल्लारा द्वारा किया गया। धनपाल शाह सरोदा द्वारा जिनवाणी भेट की गई।

 किया ध्वज परिवर्तन

 

इसके बाद क्षेत्र पर निर्मित गुरु मन्दिर में स्थापित आचार्य अभिनन्दन सागरजी महाराज की प्रतिमा पर प्रतिष्ठाचार्य पगारिया के मंत्रोच्चारण के साथ श्रद्वालुओं द्वारा विविध द्रव्य पूरित कलशों से अभिषेक किया गया। इसके साथ ही कन्हैयालाल पंचोरी खेरवाड़ा द्वारा शान्तिधारा की गई। कार्यक्रम के अन्त में आचार्य श्री की आरती मोहन लाल विरदावत बनकोडा द्वारा उतारी गई। गुरु मन्दिर शिखर पर जैन समाज शेषपुर द्वारा ध्वज परिवर्तन किया गया। महोत्सव में शेषपुर, सलूम्बर, उदयपुर, झल्लारा, डगार, सेमारी, करावली, धोलागिरी खेडा, रठौडा, पाडवा, सागवाड़ा, आसपुर, डूंगरपुर सरोदा, भीलूडा, जेठाणा समेत वागड़ मेवाड़ के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र के अनेक श्रद्वालुओं ने भाग लिया। इस अवसर पर चम्पालाल भूखिया आसपुर, पीयूष सेठ डूंगरपुर, अशोक मेहता करावली, ओम प्रकाश भोजन सेमारी, पवन जगावत बडावली, सोहनलाल वरदावत डगार, कान्तिलाल मेहता पाडवा, धनपाल पगारिया पाडवा, पूंजीलाल संघवी शेषपुर, गोर्वधन संघवी, शैलेष पंचोरी शेषपुर उपस्थित थे।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
1
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page