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इंदौर में आचार्य श्री सुनीलसागरजी महाराज का ऐतिहासिक मंगल प्रवेश : राजवाड़ा से उदासीन आश्रम तक उमड़ा गुरु भक्ति का जनसैलाब, राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ


चतुर्थ पट्टाचार्य एवं प्राकृताचार्य आचार्य श्री 108 सुनीलसागरजी महाराज का 38 मुनिराजों एवं आर्यिका संघ सहित इंदौर में ऐतिहासिक मंगल प्रवेश हुआ। राजवाड़ा से उदासीन आश्रम तक भव्य शोभायात्रा निकली तथा कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ में त्रिदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। पढ़िए श्रीफल साथी रेखा संजय जैन की यह रिपोर्ट।


इंदौर। चतुर्थ पट्टाचार्य एवं प्राकृताचार्य आचार्य श्री 108 सुनीलसागरजी महाराज का 38 संघस्थ महामुनिराजों एवं आर्यिका संघ सहित मां अहिल्या की नगरी इंदौर में ऐतिहासिक एवं भव्य मंगल प्रवेश हुआ। रियासतकालीन राजवाड़ा के पावन प्रांगण में आचार्य श्री का बैंड-बाजों, धर्मध्वजाओं और जयघोषों के बीच भव्य स्वागत किया गया। नेमी नगर जैन कॉलोनी के अध्यक्ष कैलाश लुहाड़िया, चातुर्मास मुख्य संयोजक इन्द्र कुमार सेठी सहित सकल दिगम्बर जैन समाज के हजारों श्रद्धालु गुरु भक्ति में सराबोर दिखाई दिए।

राजवाड़ा पर मां अहिल्या को किया नमन

राजवाड़ा पहुंचने पर आचार्य श्री सुनीलसागरजी महाराज ने सबसे पहले मां अहिल्याबाई होल्कर का स्मरण कर उन्हें नमन किया। इसके पश्चात मंच से धर्मसभा को संबोधित किया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के मंत्री तुलसी सिलावट ने आचार्य श्री के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। सोशल ग्रुप जीनियस द्वारा आकर्षक सांस्कृतिक एवं नृत्य प्रस्तुतियां दी गईं, जिन्हें श्रद्धालुओं ने सराहा।

शोभायात्रा मार्ग पर श्रद्धा का अद्भुत दृश्य

राजवाड़ा से प्रारंभ हुई शोभायात्रा के पूरे मार्ग को आकर्षक रंगोलियों से सजाया गया था। विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री एवं संघ का पाद प्रक्षालन किया। महिलाएं, पुरुष, युवा एवं बालिकाएं धर्मध्वजाएं लेकर शोभायात्रा में शामिल हुए। जीनियस ग्रुप की महिलाओं ने मयूर नृत्य प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

कीर्ति स्तंभ पर पुनः हुआ मंगल मिलन

रीगल स्थित कीर्ति स्तंभ पर अंतर्मुखी मुनि श्री 108 पूज्यसागरजी महाराज के सान्निध्य में ट्रस्ट अध्यक्ष अमित कासलीवाल, ट्रस्टियों एवं समाजजनों ने आचार्य श्री का स्वागत किया। यहां आचार्य श्री सुनीलसागरजी महाराज एवं मुनि श्री पूज्यसागरजी महाराज का पुनः मंगल मिलन हुआ। इसके बाद विशाल संघ उदासीन आश्रम की ओर अग्रसर हुआ। मार्गभर “आचार्य श्री की जय” के उद्घोष गूंजते रहे।

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने लिया आशीर्वाद

शोभायात्रा के दौरान प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी आचार्य श्री के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा कुछ दूरी तक शोभायात्रा में सहभागी बने।

64 थालियों से हुआ पाद प्रक्षालन, राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

उदासीन आश्रम पहुंचने पर 64 थालियों के माध्यम से आचार्य श्री एवं संघ का पाद प्रक्षालन किया गया। इसके बाद उदासीन आश्रम ट्रस्ट द्वारा संचालित कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ में 12 से 14 जुलाई तक आयोजित त्रिदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “कालजयी विरासत, समकालीन विमर्श और स्वर्णिम भविष्य की रूपरेखा” का शुभारंभ आर.के. रानेका द्वारा ध्वजारोहण के साथ हुआ।

दीप प्रज्ज्वलन एवं शास्त्र भेंट

संगोष्ठी के उद्घाटन अवसर पर ट्रस्ट अध्यक्ष अमित कासलीवाल, संदीप जैन मौयरा, आनंद गोधा, नवीन गोधा, आदित्य कासलीवाल, उपाध्याय डॉ. जयकुमार (दिल्ली) एवं पुष्पा कासलीवाल सहित अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन एवं चित्र अनावरण किया। सुधीर बिलाला परिवार द्वारा आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट की गई।

देशभर के विद्वानों का होगा मंथन

राष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर से विद्वान, शोधकर्ता एवं चिंतक जैन दर्शन, प्राकृत, श्रमण संस्कृति, समकालीन विमर्श एवं भारत की सांस्कृतिक विरासत पर अपने शोधपत्र प्रस्तुत कर रहे हैं। इस अवसर पर इंदौर सांसद शंकर लालवानी ने भी आचार्य श्री के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

आचार्य श्री का प्रेरक संदेश

प्रवचन से पूर्व ट्रस्ट अध्यक्ष अमित कासलीवाल ने संस्था का परिचय दिया। अपने उद्बोधन में आचार्य श्री सुनीलसागरजी महाराज ने कासलीवाल परिवार की पीढ़ियों से धर्म सेवा का स्मरण करते हुए कहा, “साधु चमत्कार करते नहीं, उनके जीवन में चमत्कार अपने आप होते हैं।” उन्होंने धर्म, तप, त्याग और समर्पण को जीवन का वास्तविक वैभव बताते हुए समाज को आध्यात्मिक उन्नति का संदेश दिया।

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