रत्नात्रयगिरि पावई में मुनि श्री विध्रुव सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में 21वें तीर्थंकर भगवान नमिनाथ का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव नमिनाथ विधान और वात्सल्य भोज के साथ श्रद्धापूर्वक मनाया गया। पढ़िए श्रीफल साथी सोनल जैन की यह रिपोर्ट।
रत्नात्रयगिरि पावई। दादागुरु गणाचार्य विराग सागर जी महाराज के परम शिष्य आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री विध्रुव सागर जी महाराज के सान्निध्य में शुक्रवार, 10 जुलाई को अतिशयकारी मूलनायक 21वें तीर्थंकर भगवान नमिनाथ का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया।
नमिनाथ विधान एवं वात्सल्य भोज का आयोजन
महोत्सव के अवसर पर भगवान नमिनाथ के निमित्त नमिनाथ विधान एवं वात्सल्य भोज का आयोजन पुण्यार्जक परिवार विजय जैन एवं ममता जैन (बैंक वाले), बंगला बाजार द्वारा कराया गया। श्रद्धालुओं ने विधान में भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित किया।
गोरमी को मिला चातुर्मास का सौभाग्य
प्रवक्ता सोनल जैन ने बताया कि मुनि श्री विध्रुव सागर जी महाराज को गोरमी, मेहगांव, भिंड, रत्नात्रयगिरि पावई सहित विभिन्न नगरों के समाजजनों ने चातुर्मास के लिए श्रीफल अर्पित किया। सभी की भावनाओं का सम्मान करते हुए मुनि श्री ने इस वर्ष गोरमी नगर में चातुर्मास करने की स्वीकृति प्रदान की। चातुर्मास की मंगल कलश स्थापना 30 जुलाई को गोरमी में होगी।
समाजजनों की रही सक्रिय सहभागिता
कार्यक्रम में गोलालारिय समाज सेवा समिति, महिला समिति, क्षेत्रीय कमेटी, परम संरक्षक, मेहगांव समाज, भिंड समाज तथा विभिन्न नगरों से आए श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में सहभागिता कर धर्म प्रभावना में योगदान दिया।
भव्य रही विधान की प्रस्तुति
नमिनाथ विधान की भव्य एवं भावपूर्ण प्रस्तुति मनोज केशरी द्वारा की गई, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति और आध्यात्मिक भावों से ओत-प्रोत कर दिया।













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