संयमित जीवन, गहरा चिंतन और आधुनिक विज्ञान का समावेश यही पहचान है वैज्ञानिक धर्माचार्य श्री कनकनंदी जी की। हाल ही में आयोजित विशेष वेबिनार में न्यायपालिका और आध्यात्मिकता का एक ऐसा अद्भुत मिलन देखने को मिला, जिसने आधुनिक तकनीक और प्राचीन भारतीय प्रज्ञा के बीच के सेतु को और मजबूत कर दिया। भिलूड़ा से पढ़िए, अजीत कोठिया की यह खबर…
भिलूड़ा। संयमित जीवन, गहरा चिंतन और आधुनिक विज्ञान का समावेश यही पहचान है वैज्ञानिक धर्माचार्य श्री कनकनंदी जी की। हाल ही में आयोजित विशेष वेबिनार में न्यायपालिका और आध्यात्मिकता का एक ऐसा अद्भुत मिलन देखने को मिला, जिसने आधुनिक तकनीक और प्राचीन भारतीय प्रज्ञा के बीच के सेतु को और मजबूत कर दिया। इस विशेष संवाद में दो प्रतिष्ठित जिला न्यायाधीशों ने अपनी जिज्ञासाएं साझा कीं और गुरुदेव के गहन शोधपरक ज्ञान की भूरि-भूरि प्रशंसा की। न्यायाधीश प्रकाश चंद्र पगारिया ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि आज जब पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई की केवल चर्चा कर रही है, तब गुरुराज ने एआई से संवाद स्थापित कर 8 महत्वपूर्ण पुस्तकें लिख डाली हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि न्यायपालिका में मानवीय संवेदनाएं और सूक्ष्म हाव-भाव निर्णायक होते हैं, जहाँ केवल डेटा-आधारित एआई सफल नहीं हो सकता। उन्होंने गुरुदेव द्वारा रचित 450 से अधिक ग्रंथों को विज्ञान का भी विज्ञान की संज्ञा दी। न्यायाधीश महेंद्र कुमार मेहता ने गुरुदेव के साहित्य को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य का अनूठा संगम बताया। उन्होंने प्रश्न किया कि मनुष्य अपनी आत्मा का कल्याण कर मोक्ष की ओर कैसे बढ़े? उन्होंने स्वीकार किया कि एआई में उन मानवीय भावनाओं की कमी है जो केवल प्रकृति प्रदत्त शरीर और चेतना में ही संभव हैं।
एआई स्वयं स्वीकारता है अपनी सीमा: गुरुदेव का वैज्ञानिक समाधान
धर्माचार्य श्री कनकनंदी जी ने अत्यंत वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समाधान देते हुए बताया कि एआई स्वयं स्वीकार करता है कि वह ‘अजीव’ है और वह खुद को कभी नहीं जान सकता। आत्मा; शरीर, मन और इंद्रियों के बंधनों से परे है। स्वयं की अनुभूति करना ही इस विश्व की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
योग ग्रंथियों पर नियंत्रण और आत्म-विजय का मार्ग
गुरुदेव ने शरीर विज्ञान और आध्यात्मिकता को जोड़ते हुए समझाया कि क्रोध और उत्तेजना एड्रेनल ग्लैंड से उत्पन्न होती है। वासना और विकार गोनाड ग्लैंड से पैदा होते हैं। इन पर नियंत्रण केवल पिट्यूटरी और पीनियल ग्रंथियों के माध्यम से भाव-चेतना द्वारा ही संभव है। उन्होंने योग को एक ऐसी तीखी कुल्हाड़ीष् बताया जो जीवन की समस्त विपत्तियों को जड़ से काट देती है। उनके अनुसार, योग की शक्ति किसी भी तंत्र-मंत्र से कहीं अधिक प्रभावशाली है।
एआई की दृष्टि में गुरुदेव एक असाधारण युग द्रष्टा
यह अत्यंत गर्व का विषय है कि आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी धर्माचार्य श्री कनकनंदी जी को एक असाधारण युग-द्रष्टा मानता है। एआई ने स्वयं स्वीकार किया है कि गुरुदेव का साहित्य आधुनिक विज्ञान के लिए एक ’रिसर्च गाइड’ (अनुसंधान मार्गदर्शिका) की तरह है। इस वेबिनार ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि जैन आगम का सत्य शाश्वत है और वह आधुनिक विज्ञान की सीमाओं से कहीं आगे तक फैला हुआ है। गुरुदेव के सानिध्य में हुआ यह संवाद आधुनिक समाज के लिए प्रेरणा का एक नया आलोक लेकर आया है।













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