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कांफ्रेस से दंत चिकित्सा में नए युग का सूत्रपात : शोधकर्ताओं, नवप्रवर्तकों और उद्यमियों का हुआ संगम 


तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर की ओर से इमर्जिंग ट्रेंड्स इन कंटेम्परेरी डेंटिस्ट्री पर आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में 250 रिसर्च पेपर्स एंड पोस्टर्स प्रेजेंट किए गए। यूजी श्रेणी में टीएमयू की योगेशवरी और वृंदा अग्रवाल का पोस्टर अव्वल, पीजी में डॉ. मेघना का पोस्टर पेपर प्रेजेंटेशन में प्रथम रहा। मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो.श्यामसुंदर भाटिया की यह खबर…


मुरादाबाद। बाबा कीनाराम ऑटोनोमस स्टेट मेडिकल कॉलेज, चंदौली के दंत चिकित्सा विभाग के डॉ. पीयूष शिवहरे ने डायोड लेजर पर बोलते हुए कहा कि डायोड लेजर तकनीक ने आधुनिक दंत चिकित्सा में क्रांति ला दी है, जिससे अधिक सटीक, दर्द रहित और प्रभावी उपचार विकल्प उपलब्ध हो गए हैं। उन्होंने बताया,लेजर – लाइट एम्प्लीफिकेशन बाय स्टिमुलेटेड एमिशन ऑफ रेडिएशन एक ऐसा उपकरण है, जिसके उपयोग से ऑपरेशन के आसपास के क्षेत्रों को न्यूनतम क्षति पहुंचाते हुए कोमल और कठोर ऊतकों को काटने, आकार देने या हटाने का कार्य का आसान हो जाता है। डॉ. शिवहरे ने दंत चिकित्सा में विभिन्न प्रकार के लेजर के उपयोग पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया, डायोड लेजर,सीओ 2 लेजर, एनडीएग लेजर, ईआर लेजर प्रमुख हैं। इनमें से डायोड लेजर अपने कॉम्पैक्ट आकार, किफायती मूल्य और कोमल ऊतकों से संबंधित प्रक्रियाओं में अधिक प्रभावशीलता के कारण विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है। डॉ. शिवहरे तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर की ओर से इमर्जिंग ट्रेंड्स इन कंटेम्परेरी डेंटिस्ट्री पर आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के समापन में गेस्ट स्पीकर बोल रहे थे। कॉन्फ्रेंस में कुल 250 रिसर्च पेपर्स एंड पोस्टर्स प्रेजेंट किए गए। यूजी श्रेणी में टीएमयू की योगेशवरी और वृंदा अग्रवाल का पोस्टर अव्वल,जबकि पीजी में डॉ. मेघना का पोस्टर प्रथम, रिसर्च पेपर प्रेजेंटेशन में डॉ. हर्षित सेठी फर्स्ट आए।

दंत चिकित्सा के क्षेत्र में एक नए युग का नेतृत्व कर रहे हैं

सिंहगढ़ डेंटल कॉलेज से डॉ. विनीत विनय ने एंटरप्रेन्योरशिप इन डेंटिस्ट्री एंड एआई डिडेक्शन ऑफ ओरल कैंसर पर बोलते हुए कहा, तकनीकी प्रगति को बाज़ार तक पहुंचाने में उद्यमियों की अहम भूमिका है। डेंटल स्टार्टअप स्थापित करके, उपयोगकर्ता के अनुकूल उपकरण विकसित करके और रोगी प्रबंधन के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाकर वे नवाचार और नैदानिक अभ्यास के बीच की खाई को पाट सकते हैं। कई उद्यमी टेलीडेंटिस्ट्री पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिससे परामर्श और अनुवर्ती जांच, विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में अधिक सुविधाजनक हो जाती हैं। शोधकर्ता, नवप्रवर्तक और उद्यमी मिलकर दंत चिकित्सा के क्षेत्र में एक नए युग का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके सहयोगात्मक प्रयासों से रोगी देखभाल में सुधार हो रहा है, दक्षता बढ़ रही है और आधुनिक दंत उपचार अधिक किफायती और व्यापक रूप से उपलब्ध हो रहे हैं। यह गतिशील तालमेल मौखिक स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में संभावनाओं की सीमाओं को लगातार आगे बढ़ा रहा है।

दंत चिकित्सा पद्धतियां साक्ष्य-आधारित हों 

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से डिपार्टमेंट ऑफ ओरल मेडिसिन एंड रेडियोलॉजी के प्रो. प्रद्युम्न वर्मा ने कोन बीम 3डी इमेजिंग तकनीक पर बोलते हुए कहा,शोधकर्ता वैज्ञानिक ज्ञान के विस्तार और नई उपचार पद्धतियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।दूसरी ओर समेकित देखभालरू बहुविषयक अभ्यास का भविष्य पैनल चर्चा में वक्ताओं ने कहा, बायोमटेरियल्स, रीजनरेटिव डेंटिस्ट्री और डिजिटल इमेजिंग जैसे क्षेत्रों में उनके कार्यों से दांतों के रंग के अनुरूप रेस्टोरेशन, स्टेम सेल थेरेपी और बेहतर निदान उपकरण जैसी महत्वपूर्ण खोजें संभव हुई हैं। निरंतर शोध यह सुनिश्चित करता है , दंत चिकित्सा पद्धतियां साक्ष्य-आधारित हों और आधुनिक स्वास्थ्य देखभाल मानकों के अनुरूप हों। दूसरी ओर नवप्रवर्तक इन वैज्ञानिक खोजों को व्यावहारिक समाधानों में लागू करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। उन्होंने दंत कृत्रिम अंगों के लिए 3डी प्रिंटिंग एक ही दिन में क्राउन बनाने के लिए सीएडी/सीएएम सिस्टम और न्यूनतम चीर-फाड़ वाली प्रक्रियाओं के लिए लेजर तकनीक जैसे अत्याधुनिक उपकरण पेश किए हैं। ये नवाचार न केवल सटीकता बढ़ाते हैं ,बल्कि उपचार के समय और रोगी की असुविधा को भी काफी कम करते हैं। पैनल चर्चा में डॉ. शलभ मेहरोत्रा ,डॉ. स्वतंत्र अग्रवाल, डॉ. सत्यजीत नायक, डॉ. सुनीता गुप्ता, डॉ. विनीता निखिल, डॉ. के. वी. अरुण कुमार, डॉ. जॉनसन और डॉ. पुनीत बत्रा आदि शामिल रहे।

इनकी रही सहभागिता 

कॉन्फ्रेंस में तीर्थंकर महावीर डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के प्रिंसिपल प्रो. प्रदीप तांगड़े, वाइस प्रिंसिपल डॉ. अंकिता जैन के संग- संग सुभारती डेंटल कॉलेज एवम् रिसर्च सेंटर, मेरठ से कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्री और एंडोडोंटिक्स विभाग से विभागाध्यक्ष डॉ. विनीता निखिल,मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंस, नई दिल्ली से ओरल मेडिसिन और रेडियोलॉजी विभाग की एचओडी डॉ. सुनीता गुप्ता,आईटीएस डेंटल कॉलेज और अस्पताल, दिल्ली से ओरल सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. के.वी. अरुण, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी से पब्लिक हेल्थ डेंटिस्ट्री विभाग, दंत विज्ञान संकाय के प्रो. नवीन पी.जी. मौलाना आजाद दंत विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली से जन स्वास्थ्य दंत चिकित्सा विभाग के एचओडी डॉ. विक्रांत मोहंती,एसजीटी यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद से स्वास्थ्य दंत चिकित्सा विभाग से डॉ. शौर्य टंडन,कोठीवाल डेंटल कॉलेज एवम् अनुसंधान केंद्र, मुरादाबाद से मुख चिकित्सा एवम् रेडियोलॉजी विभाग से एचओडी डॉ. राजेंद्र गौड़ा पाटिल, डॉ. अभिनय अग्रवाल, डॉ. निमिष अग्रवाल, डॉ. विकास सिंह, डॉ. शिल्पा दत्ता मलिक, डॉ. उपेंद्र मलिक, डॉ. हरतिमा निगम, डॉ. जैनुल आब्दीन, डॉ. सिवान सतीश, डॉ. दीपक ठाकुर, डॉ. कार्तिकेय सक्सेना, डॉ. अतुल जैन, डॉ. रचना बहुगुणा की उल्लेखनीय मौजूदगी रही। इनके अलावा स्टूडेंट्स तीशा जैन, साक्षी जयसवाल, उत्सव बेरा आदि की कॉन्फ्रेंस में सक्रिय भूमिका रही।

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