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धर्मघोष और भक्तिभाव से हुआ याग मंडल विधान : श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन समवशरण मंदिर में प्रतिमाएं विराजमान 


मड़ावरा रोड स्थित श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन समवसरण मंदिर में हुए श्री 1008 यागमंडल विधान, वेदी प्रतिष्ठा एवं श्रीजी विराजमान का तीन दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम मंगलवार को विधि-विधान और भक्तिभाव से पूर्ण हुआ। समापन अवसर पर मंदिर परिसर जिनेंद्र भक्ति, शांतिधारा और धर्मघोष से गुंजायमान रहा। महरौनी से पढ़िए, यह खबर…


महरौनी (ललितपुर)। मड़ावरा रोड स्थित श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन समवसरण मंदिर में हुए श्री 1008 यागमंडल विधान, वेदी प्रतिष्ठा एवं श्रीजी विराजमान का तीन दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम मंगलवार को विधि-विधान और भक्तिभाव से पूर्ण हुआ। समापन अवसर पर मंदिर परिसर जिनेंद्र भक्ति, शांतिधारा और धर्मघोष से गुंजायमान रहा। जिससे संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। यह पावन आयोजन मुनिश्री सुधासागर जी महाराज की पावन प्रेरणा से हुआ। अंतिम दिवस प्रातः अभिषेक, शांतिधारा एवं नित्य पूजन के बाद समवशरण मंदिर में नववेदिकाओं पर भगवान जिनेंद्र की प्रतिमाओं का विधिवत पूजन कर विराजमान कराई गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भावविभोर होकर पुण्यलाभ अर्जित किया।

आयोजन से समाज में धार्मिक चेतना और नई ऊर्जा 

तीन दिनों तक चले इस आयोजन में यागमंडल विधान, यज्ञ अनुष्ठान, नित्य नियमात्मक पूजन, आरती-भजन तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम किए गए। दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं की सहभागिता से मंदिर परिसर निरंतर भक्ति और शांति के वातावरण में सराबोर रहा। सारी धार्मिक क्रियाएं प्रतिष्ठाचार्य देवेश शास्त्री द्रोणगिर के दिशा-निर्देश में हुई। संगीतकार सनिल एंड पार्टी ने अपने सुमधुर भजनो से माहौल को भक्तिमय कर दिया।

आयोजक मंडल के अनुसार इस आयोजन से समाज में धार्मिक चेतना और नई ऊर्जा मिली है। समापन अवसर पर सकल दिगंबर जैन समाज महरौनी की ओर से आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले दानदाताओं, कार्यकर्ताओं एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार जताया। इसमें श्री चंद्रप्रभु जिनालय मंदिर कमेटी एवं सकल दिगंबर जैन समाज का सहयोग रहा।

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