उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के मंडी-बड़ौत में शुक्रवार को भावलिंगी संत द्वारा मंगल प्रवचन का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जैन धर्म के उपदेशों पर आधारित था। जिसमें संतश्री ने धर्म, आत्मा, कर्म और साधना जैसे मूल विषयों पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। बड़ौत से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर…
बडौत। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के मंडी-बड़ौत में शुक्रवार को भावलिंगी संत द्वारा मंगल प्रवचन का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जैन धर्म के उपदेशों पर आधारित था। जिसमें संतश्री ने धर्म, आत्मा, कर्म और साधना जैसे मूल विषयों पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। इस प्रकार के प्रवचन में साधारण जनता को आध्यात्मिक और नैतिक जीवन के मार्ग पर प्रेरित किया जाता है। प्राचीन भारतीय परंपरा में ऐसे प्रवचन का आयोजन लोगों को धार्मिक शिक्षाओं और जीवन मूल्यों से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। इस कार्यक्रम में संतश्री के शब्दों में जीवन के उच्च आदर्शों और आत्म अन्वेषण पर बल दिया गया। उन्होंने बताया कि जैन धर्म में अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे सिद्धांतों का पालन व्यक्ति के आत्मिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। संत ने यह भी समझाया कि ईश्वर की प्राप्ति और मोक्ष की ओर बढ़ने के लिए नियमित ध्यान, आत्मा के अहिंसा-भाव को अपनाना और समाज में सकारात्मक योगदान देना आवश्यक है। प्रवचन के दौरान संत ने श्रोताओं से आग्रह किया कि वे अपने दैनिक जीवन में संयम, करुणा और सदाचार को अपनाएं। यह प्रवचन खासकर युवा पीढ़ी को धर्म के प्रति जागरूक बनाने और समाज में शांति-सहिष्णुता का संदेश फैलाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।
प्रवचन का उद्देश्य
जैन धर्म के मौलिक शिक्षाओं को समझाना और जीवन में धर्म का पालन करना सिखाना। इसमें अहिंसा (जीवों के प्रति दया), सत्य, संयम और आत्म-अनुशासन जैसे मूल्यों का अभ्यास जीवन को श्रेष्ठ बनाता है। ऐसे आयोजन समुदाय को जोड़ते हैं और सामाजिक सद्भाव, आत्म-विकास एवं नैतिकता को बढ़ावा देते हैं। यह मंगल प्रवचन जैन परंपरा के अन्तर्गत आने वाला एक महत्वपूर्ण साधना कार्यक्रम था, जिसमें संत के उपदेशों ने उपस्थित लोगों को धार्मिक चिंतन और आत्मिक सुधार की ओर प्रेरित किया।













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