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25 मंडलीय सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य शुभारंभ : गिरारगिरी जी में मुनि संघ का मंगल प्रवेश, धार्मिक अनुष्ठानों से गूंजा क्षेत्र


 दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र गिरारगिरी जी में 16 से 23 जनवरी तक आयोजित होने वाले 25 मंडलीय 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान, श्री आदिनाथ स्वामी निर्वाणोत्सव, वार्षिक मेला, विश्व शांति महायज्ञ एवं भव्य रथोत्सव का शुभारंभ शुक्रवार को अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं विधि-विधान के साथ हुआ। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर…


ललितपुर। श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र गिरारगिरी जी में 16 से 23 जनवरी तक आयोजित होने वाले 25 मंडलीय 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान, श्री आदिनाथ स्वामी निर्वाणोत्सव, वार्षिक मेला, विश्व शांति महायज्ञ एवं भव्य रथोत्सव का शुभारंभ शुक्रवार को अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं विधि-विधान के साथ हुआ। यह महोत्सव आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री समत्वसागर जी महाराज एवं मुनि श्री शीलसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में संपन्न हो रहा है।

मुनि संघ का भव्य मंगल प्रवेश 

16 जनवरी को प्रातः मुनि श्री समत्वसागर जी महाराज ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश गिरारगिरी जी में गाजे-बाजे के साथ हुआ। इस अवसर पर घटयात्रा जुलूस पुराना गिरार (सेठ निवास) से प्रारंभ हुआ, जिसमें महिलाएँ मस्तक पर मंगल कलश धारण कर भक्ति भाव से चल रही थीं।

धार्मिक क्रियाओं का विधिवत आयोजन 

प्रचार मंत्री डॉ. सुनील संचय ने जानकारी देते हुए बताया कि शुभारंभ अवसर पर ध्वजारोहण, मंडप उद्घाटन एवं मंडप शुद्धि की विधियाँ संपन्न हुईं। धार्मिक विधि-विधानों का संचालन पंडित मनोज शास्त्री (बगरोही), पंडित देवेंद्र शास्त्री (मड़ावरा) तथा पंडित विकर्ष शास्त्री (सलेहा) द्वारा किया गया। अतिथियों द्वारा चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्ज्वलन किया गया। इसके पश्चात मंगल कलश स्थापना, पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का पुण्य आयोजन हुआ। इस अवसर पर मुनि श्री समत्वसागर जी महाराज ने अपने प्रेरक प्रवचनों में कहा कि सिद्धचक्र महामंडल विधान केवल एक अनुष्ठान नहीं, अपितु आत्मा को सिद्धत्व की ओर अग्रसर करने का साधन है। श्रद्धा, ज्ञान और चारित्र इन तीनों का समन्वय ही मोक्षमार्ग का मूल है। उन्होंने कहा कि आज का मानव भौतिक उपलब्धियों में उलझकर आत्मिक शांति से दूर होता जा रहा है। जैन धर्म का विधान, तप, संयम और अहिंसा व्यक्ति को आत्मकल्याण के साथ-साथ विश्व शांति का मार्ग दिखाते हैं। मुनिश्री ने सिद्धचक्र की उपासना को कर्म निर्जरा और आत्मशुद्धि का प्रभावी माध्यम बताया।

विशेष धार्मिक अनुष्ठान 

प्रवचनों के उपरांत नंदी मंगल, सकलीकरण, इन्द्र प्रतिष्ठा एवं मंडप प्रतिष्ठा संपन्न हुई। सायंकालीन कार्यक्रमों में आचार्य भक्ति, श्रुत समाधान, भव्य महाआरती, शास्त्र स्वाध्याय तथा रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर गिरारगिरी कमेटी के अध्यक्ष चक्रेश जैन, महामंत्री प्रदीप जैन मड़ावरा, कोषाध्यक्ष मुकेश सिंघई, आयोजन समिति अध्यक्ष अनिल जैन, महामंत्री राजेश रज्जू मड़ावरा, कोषाध्यक्ष दीपचंद्र जैन, अभिषेक जैन दीपू, अजित जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

अतिथियों को आमंत्रण 

आयोजन में सहभागिता के लिए गिरारगिरी तीर्थक्षेत्र कमेटी के पदाधिकारियों अजित जैन (स्टील, मड़ावरा), त्रिलोक जैन मड़ावरा, डॉ. सुनील संचय, सुधीर जैन द्वारा जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ, नगर पालिका अध्यक्ष सोनाली जैन सहित नगर के प्रमुख समाज श्रेष्ठियों को आमंत्रण पत्र भेंट किए गए।

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