आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी, आर्यिका श्री विश्वयश मति जी और आर्यिका श्री विमल मति का प्रथम बार मप्र के सिद्धक्षेत्र नेमावर,सिद्धवरकूट, पावागिरी ऊन के दर्शन अर्चना कर 31 वर्ष के संयमी जीवन में बड़वानी नगर में प्रवेश कर आहार के बाद दोपहर को श्री बावनगजा के लिए मंगल विहार हुआ। बड़वानी से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर…
बड़वानी (बावनगजा)। आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी, आर्यिका श्री विश्वयश मति जी और आर्यिका श्री विमल मति का प्रथम बार मप्र के सिद्धक्षेत्र नेमावर,सिद्धवरकूट, पावागिरी ऊन के दर्शन अर्चना कर 31 वर्ष के संयमी जीवन में बड़वानी नगर में प्रवेश कर आहार के बाद दोपहर को श्री बावनगजा के लिए मंगल विहार हुआ। 4 किमी के बाद श्री पार्श्व गिरी के दर्शन कर शुक्रवार को शाम बावनगजा में प्रवेश हुआ। आर्यिका संघ ने 84 फिट के श्री आदिनाथ भगवान के दर्शन कर पहाड़ चढ़कर चुलगिरी पर इंद्रजीत और कुंभकरण और 5-5 करोड़ मुनिराजो की सिद्ध निर्वाण भूमि के दर्शन किए। शनिवार को आहार के बाद एक दिवसीय सिद्ध चक्र विधान मंत्रोच्चार पूर्वक किए। देहली की शालू मनीष जैन विधान के पुण्यार्जक रहे। विधान में आचार्य श्री विप्रणत सागर जी, आर्यिका श्री सृष्टि भूषण, श्री विश्वयश मति और आर्यिका श्री विमल मति का सानिध्य रहा। 11 जनवरी को प्रातः पाटी (खेतिया) तीर्थंकर लेनी के दर्शन के लिए मंगल विहार होगा। इस अवसर पर धामनोद जैन समाज से दीपक प्रधान, अजय जैन, राकेश जैन, भोपाल से राजकुमार जैन ने विधान का पुण्य लाभ लिया।













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