इस संसार में एक भी स्थान नहीं है, जहां सिर्फ धर्मात्मा ही रहेंगे। पापियों के लिए सारा संसार पड़ा है। चारों ओर पापियों का राज है। ऐसा कोई स्थान नहीं है। जहां सिर्फ धर्मात्मा रहेंगे। कोई पापी नहीं रह सकता। यह उद्गार दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में धर्मसभा में मुनिश्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए। थूवोनजी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर…
थूवोनजी। इस संसार में एक भी स्थान नहीं है, जहां सिर्फ धर्मात्मा ही रहेंगे। पापियों के लिए सारा संसार पड़ा है। चारों ओर पापियों का राज है। ऐसा कोई स्थान नहीं है। जहां सिर्फ धर्मात्मा रहेंगे। कोई पापी नहीं रह सकता। यह उद्गार दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में धर्मसभा में मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने धर्मात्माओं के लिए कोई स्थान सुरक्षित किया ही नहीं है। संसार ऐसा ही है जब किसी को संत बनने की प्रेरणा देते हैं तो सब असार बताते हैं। संसार में कुछ नहीं रखा सब छोड़ दें। भक्त ने वैराग्य धारण कर लिया फिर गुरु मौन हो गए। जय श्री राम हो गया। अब तो सिर्फ मौन हो गए। दुनिया में कैसे जीना है। इसकी कला सिखाई गई है। कदम चले कदम चिठ्ठे कदम भूंजे जा भांजे मैं कैसे चलू कैसे खाऊं कैसे रहूं। ये सब मैं कुछ करुंगा मुझे पाप का बंध नहीं होना चाहिए। कीचड़ में तो रहूंगा लेकिन, जंग नहीं लगना चाहिए।
कोई भी व्यक्ति थूवोनजी का ट्रस्टी बन सकता है
इस अवसर पर क्षेत्र कमेटी के प्रचार मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि मुनिश्री सुधासागरजी महाराज के आशीर्वाद और प्रेरणा से इस तीर्थ को देशभर के ही नहीं दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाले हमारे जैन बंधु दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी कमेटी के ट्रस्टी बनकर कमेटी से जुड़ सकते हैं। आज भी ललितपुर जैन समाज के स्तंभ राजेंद्रकुमार लल्लू भैया परम संरक्षक बन रहे हैं। इस दौरान जैन समाज शाढ़ौरा ने मुनि श्री को श्री फल भेंट किए। इनका सम्मान दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल उपाध्यक्ष धर्मेंद्र रोकड़िया, संजीव श्रागर, संजीव जैन, महामंत्री मनोज भैसरवास, कोषाध्यक्ष प्रमोद मंगल, दीप मंत्री शैलेंद्र दद्दा, राजेंद्र हलवाई, प्रदीप रानी जैन, अनिल बंसल, डॉ.जितेंद्र जैन, प्रचार मंत्री विजय धुर्रा ने किया।
दुनिया में यदि खोटा है तो चोखा होगा ही होगा
दुनिया में यदि खोटा है तो चोखा होगा ही होगा। अपन कहें इतने साल धर्म करते हुए हो गए। कोई शांति नहीं मिली। वर्षाे से मंदिर जा रहे हैं। कुछ नहीं हुआ गुरुओं के पास गया कुछ भी नहीं मिला तो भी थकना नहीं है। कितना ही थक जाओ। थककर बैठना नहीं है। फिर उठो और खोज करने में लग जाओ। एक संकल्प कर लो मैं सत्य को खोजकर रहूंगा। हीरा कहां मिलता है, कोयला की खान से निकाला जाता ह।ै जहां काला ही काला कोयला भरा पड़ा ह।ै उसके बीच में एकदम चमकदार हीरा मिला। वह सबसे अच्छा माना जाता है। ऐसा सब चीजों में समझना।
…जहां भगवान बनने वाली आत्मा रहती है
उन्होंने कहा कि ये शरीर कैसा है इस शरीर में मल मूत्र भरा पड़ा है। कैसे गंदे स्थान पर आत्मा को रख दिया। सबसे अच्छा शरीर देवताओं का होता है और संसार में सबसे गंदा शरीर मनुष्य का होता है। लकड़ी जल कोयला भई कोयला जल भई राख। राख से जग अपनी गंदगी को दूर कर लेता है। इसमें आत्मा को रखा गया, जो भगवान बन सकती हैं। इसके लिए खोज जारी रखना पड़ेगा। हम धर्म करते हुए थक रहे हैं। दया करने में थक गए। हिंसा करने वाले भी सुबह उठते ही फिर युद्ध करने चले जाते हैं और तुम धर्म करने-करते थक गए। नहीं थकना नहीं हम एक जीव को भी नहीं बचा पाए तो भी नहीं थकंेगे। पारसनाथ स्वामी अवधि ज्ञानी थे। सब जानते थे। ये नाग नागिन इतने जल चुके थे कि ये बचेंगे नहीं फिर भी बचाने में लगे रहे। डॉक्टरों को भी यही कह गया कि अंतिम श्वास तक प्रयास करता रहता है। यदि डॉक्टर एक मिनट पहले भी मरीज़ को भगा दे तो एफआईआर हो सकती है। डॉ. अंतिम समय तक प्रयास करता रहता है, इसलिए हमें थकान नहीं है।













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