दिगंबर जैन मंदिर से बुधवार को मुनिश्री विभंजनसागर जी महाराज का मनावर के लिए विहार हुआ। सुबह समाजजनों ने ढोल-ताशों के साथ उन्हें भावपूर्ण विदाई देकर आशीर्वाद प्राप्त किया। विहार पूर्व आयोजित धर्म सभा में मुनिश्री ने कहा कि जहां सच्ची आस्था, प्रेम और समर्पण होता है। वहां ईश्वर का वास स्वतः हो जाता है। मांडू से पढ़िए, साभार संकलित यह खबर…
मांडू। दिगंबर जैन मंदिर से बुधवार को मुनिश्री विभंजनसागर जी महाराज का मनावर के लिए विहार हुआ। सुबह समाजजनों ने ढोल-ताशों के साथ उन्हें भावपूर्ण विदाई देकर आशीर्वाद प्राप्त किया। विहार पूर्व आयोजित धर्म सभा में मुनिश्री ने कहा कि जहां सच्ची आस्था, प्रेम और समर्पण होता है। वहां ईश्वर का वास स्वतः हो जाता है। ईश्वर का अस्तित्व किसी मूर्तरूप तक सीमिति नहीं, बल्कि सच्ची भक्ति और विश्वास की अनुभूति में समाया होता है। उन्होंने कहा कि जहां भक्ति है वहां शक्ति है। भक्ति मनुष्य के भीतर अद्भुत उर्जा, साहस और आत्मबल का संचार करती है। जब व्यक्ति सच्चे मन से प्रभु की शरण में जाता है तो उसका मन स्थिर और निर्भय हो जाता है। उसके विचारों में सकारात्मकता आती है। वह कठिन परिस्थितियों का सामना धैर्य और सहनशीलता के साथ कर पाता है।
मुनिश्री ने समाज में प्रेम, सद्भाव और एकता बनाए रखने का संदेश दिया
मुनिश्री ने भक्ति का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि भक्ति किसी विधि-विधान की मोहताज नहीं, यह मन की पुकार है। निःस्वार्थ प्रेम, समर्पण और विश्वास का नाम ही भक्ति है। भक्ति व्यक्ति को अपने कर्मों के प्रति ईमानदार, जिम्मेदार और उर्जावान बनाती है। उन्होंने कहा कि भक्ति के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति कभी अकेला नहीं होता, क्योंकि उसे यह विश्वास रहता है कि प्रभु सदैव उसके साथ हैं। यही भावना जीवन को आनंदमय बनाती है और सच्चा सुख प्रदान करती है। अंत में मुनिश्री ने समाज में प्रेम, सद्भाव और एकता बनाए रखने का संदेश देते हुए सभी को आशीर्वाद प्रदान किया। इस अवसर पर संजय छाबड़ा,मौसम झांझरी, संजय दिलावरा, विजय रावका, अजय छाबड़ा, यश पवन छाबड़ा, सुरेश व मुकेश गंगवाल, दिलीप गंगवाल, चेतना छाबड़ा, ममता, रूपा, नेहा छाबड़ा, निशा, रानी, सरला गंगवाल, शिवानी रावका सहित बड़ी संख्या में महिला मंडल एवं समाजजन उपस्थित रहे।













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