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जिनबिम्ब के दर्शन मात्र से होती है सम्यक ज्ञान की प्राप्ति: मुनि श्री पावन सागर जी महाराज के सान्निध्य में सिद्धचक्र महामंडल विधान प्रारंभ 


दिगंबर जैन मंदिर प्रबंध समिति गायत्री नगर, महारानी फार्म, जयपुर के तत्वावधान एवं श्री आदिनाथ महिला मंडल द्वारा मुनि श्री पावन सागर जी महाराज मुनि श्री सुभद्र सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में बुधवार को प्रातः 8 बजे शांतिधारा सौधर्म इंद्र प्रदीप जैन बाकलीवाल और महायज्ञनायक उदयभान जैन नें की। जयपुर से पढ़िए, यह खबर…


जयपुर। दिगंबर जैन मंदिर प्रबंध समिति गायत्री नगर, महारानी फार्म, जयपुर के तत्वावधान एवं श्री आदिनाथ महिला मंडल द्वारा मुनि श्री पावन सागर जी महाराज मुनि श्री सुभद्र सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में बुधवार को प्रातः 8 बजे शांतिधारा सौधर्म इंद्र प्रदीप जैन बाकलीवाल और महायज्ञनायक उदयभान जैन बडजात्या ने की। इसके बाद सिद्ध चक्र महामंडल विधान का शुभारंभ हुआ। महिला मंडल की प्रचार मंत्री अनिता बड़जात्या ने अवगत कराया कि विभिन्न अनाजों से निर्मित शानदार सिद्ध चक्र महामंडल विधान पर अशोक नीलू गंगवाल ने मुख्य मंगल कलश की स्थापना की। अशोक विमला पापडीवाल ने अखंड दीप प्रज्ज्वलन किया। मुनि श्री पावन सागर जी महाराज ने अपने मंगल आशीर्वचन में कहा कि शाश्वत अष्टान्हिका महापर्वों में सिद्धों की आराधना करना महान पुण्य का कार्य है।

उन्होंने कहा कि जिन बिम्ब के दर्शन मात्र से सम्यक ज्ञान की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर मन्दिर प्रबंध समिति और महिला मंडल की ओर से सौधर्म इंद्र और विज्ञानाचार्य का स्वागत किया। इस कार्यक्रम में समाज की महिला और पुरुष उपस्थित होकर उत्साह के साथ विधान पूजा कार्यक्रम में सिद्धों के 8 गुण और 16 कारण भावनाओं के 16 अर्घ्य कुल 24 अर्घ्य इंद्र इंद्राणियों ने मंडल पर चढ़ाए। सभी मांगलिक क्रियाएं विधानाचार्य पं अजीत शास्त्री ने करवाई।

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