आचार्य विनिश्चय सागर महाराज का मंगल आशीर्वाद लेने चारों दीक्षार्थी भैया ब्रह्मचारी प्रकाश भैया, विकास भैया, उमंग भैया एवं पंकज भैया सोमवार की संध्या बेला में रामगंजमंडी पधारे। उन्होंने सर्वप्रथम मूल नायक श्री शांतिनाथ भगवान के दर्शन किए। दर्शन के बाद प्रवचन सभागार में चारों दीक्षार्थी भैयाओ की गोद भराई की गई। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर…
रामगंजमंडी। आचार्य विनिश्चय सागर महाराज का मंगल आशीर्वाद लेने चारों दीक्षार्थी भैया ब्रह्मचारी प्रकाश भैया, विकास भैया, उमंग भैया एवं पंकज भैया सोमवार की संध्या बेला में रामगंजमंडी पधारे। उन्होंने सर्वप्रथम मूल नायक श्री शांतिनाथ भगवान के दर्शन किए। दर्शन के बाद प्रवचन सभागार में चारों दीक्षार्थी भैयाओ की गोद भराई की गई। सर्वप्रथम आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज संघस्थ ब्रह्मचारी प्रताप भैया, ब्रह्मचारी राहुल भैया, ब्रह्मचारी प्रीति दीदी, ब्रह्मचारी निक्की दीदी, ब्रह्मचारी सीमा दीदी द्वारा चारों दीक्षार्थी भैयाओ की गोद भराई की एवं उनके संयम पथ की अनुमोदना की। इसके बाद सकल दिगंबर जैन समाज रामगंजमंडी की ओर से संरक्षक अजीत सेठी, अध्यक्ष दिलीप विनायका, उपाध्यक्ष चेतन बागड़िया, उपाध्यक्ष कमल लुहाड़िया, महामंत्री राजकुमार गंगवाल, मंत्री राजीव बाकलीवाल ने दीक्षार्थी भैयाओं की गोद भराई की एवं उनका अभिनंदन किया। संचालन महामंत्री राजकुमार गंगवाल ने किया। गोद भराई करने के लिए सभी समाज बंधुओ में भारी उत्साह देखा गया।
3 नवंबर को लेंगे दीक्षा
आचार्य श्री 108 सन्मति सागर महाराज के शिष्य आचार्य श्री 108 सुंदर सागर महाराज के कर कमलों से जयपुर के सांगानेर स्थित चित्रकूट कॉलोनी में चारों दीक्षार्थी भैयाओ की दीक्षा होगी। इन मांगलिक पलों में सर्वप्रथम दीक्षार्थी ब्रह्मचारी विकास भैया ने अपने उद्बोधन में सभी को दीक्षा महोत्सव में पधारने के लिए कहा और उन्होंने कहा कि आपके यहां का जिनालय काफी अलौकिक है। वह यहां के जिनालय को देखकर काफ़ी अभिभूत हुए। इसी क्रम में दीक्षार्थी उमंग भैया ने कहा कि हम उस अवस्था को प्राप्त करने जा रहे हैं, जो हमें मोक्ष रूपी लक्ष्मी प्राप्त कराएगी। आप सभी 3 नवंबर को होने वाली दीक्षा में ज्यादा से ज्यादा संख्या में पधारें। पंकज भैया ने दीक्षा के विषय में बताते हुए कहा कि दीक्षा लेकर मुनि बनकर हम मनुष्य जीवन में भगवान बन सकते हैं। दीक्षार्थी प्रकाश भैया ने कहा कि आप भी मुनि दीक्षा लेकर महाव्रती बनकर समाधि मरण कर सकते हैं। उन्होंने नियम संयम को ग्रहण कर मुनि बनकर महाव्रती बनने को सौभाग्यशाली बताया।
चारों दीक्षार्थी भैया में दिखा विनय संपन्नता का अद्भुत भाव
जब चारों दीक्षार्थी भैयाओ गुरु चरणों में पहुंचे तब उन्होंने विनम्र भाव के साथ गुरु चरणों में श्रीफल समर्पित करते हुए मंगल आशीर्वाद लिया और कहा कि आप हमें आशीर्वाद दें कि हमारा यह संयम का पथ और बलवती हो और आप भी इस महोत्सव में पधारकर हमें सानिध्य प्रदान करें। उस समय का दृश्य सचमुच भाव विहल कर देने वाला था। काफी संख्या में मौजूद भक्त इन दृश्यों के साक्षी बने। सचमुच यह दृश्य विनय संपन्नता का एक अनुपम उदाहरण प्रस्तुत कर गया। सभी दीक्षार्थी भैयाओ ने गुरुदेव की वैयावृति की गुरुदेव की चरणों की रज को अपने मस्तक पर लगाया। इन क्षणों में गुरुदेव का वात्सल्य भाव भी अलौकिक था।
मन शुद्ध नहीं है तो चिंतन करो चिंता मत करो
मंगलवार की प्रातः बेला में गुरुदेव ने मन वचन के की शुद्धि पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मन शुद्ध नहीं है तो चिंतन करो। चिंता मत करो। चिंता हमें अशुभ की ओर ले जाती है और संकलेश परिणाम लाती है। तत्व पदार्थ का चिंतन करना मन की शुद्धि के लिए होता है। उन्होंने कहां श्वांस को लेना उदर में रोक देना और एक समय के बाद छोड़ना मानसिक शुद्धि का कारण है। अभ्यस्थ होंगे पंच परमेष्ठी का आलंबन लेंगे तो और अच्छा होगा। मन शुद्धि के लिए स्वाध्याय भी आवश्यक है। 5 मिनट का समय निकालकर स्वाध्याय करेंगे तो आपके मन की शुद्धि होगी। वर्तमान परिपेक्ष में कहा कि वर्तमान में व्यक्ति तनाव एवं चिंता में हैं। लोग दवाखाने से परेशान हैं। मन की शुद्धि अनिवार्य है। बात करने से नहीं मन को सुरक्षित करने से होगी।
वाणी ऐसी बोलिए मन में शक्कर हो
वचन शुद्धि के विषय में बोलते हुए एक लोकोक्ति को बताया कि वाणी ऐसी बोलिए मन का आपा खोए औरन को शीतल करे। स्वच्छ भी निर्मल हुए। वाणी ऐसी बोलिए कि जो फूल बरसाने वाली हो। ऐसी वाणी बोलनी चाहिए, जैसे कि मन में शक्कर हो। वचन में अनर्गल नहीं बोलना, आगम सम्मत बोलना वचन शुद्धि। वाणी मीठी होनी चाहिए। बिना गुड के शक्कर जैसी मीठी होना चाहिए। शब्दों का मीठापन व्यक्ति को प्रसन्न रखता है। अच्छा रखता है क्योंकि, आपने शुद्ध मन से बोला है। काय शुद्धि के विषय में बताते हुए कहा कि मनुष्य जीवन में काय शुद्धि का विशेष महत्व है उन्होंने कहा कि विज्ञान कहता है कि बाहर की गलत वर्गणाए संक्रमित होती हैं।
समय निकालो स्वाध्याय के लिए
यदि आप स्नान कर किए होते हैं तो ही आप धार्मिक क्रिया करने के अधिकारी हैं। कोई भी प्रकार से यदि अशुद्धि है तो काय की शुद्धि नहीं हो सकती जिसका मन शुद्ध होगा तो उसकी आत्मा भी शुद्ध होगी। उन्होंने कहा कि सामने वाला प्रसन्न हो ऐसा वचन बोलो। समय निकालो स्वाध्याय के लिए, आप एक ही पेज पढ़ो स्वाध्याय मन की शुद्धि ध्यान भी मन की शुद्धि का कारण है। अभ्यास बनाना होगा मन वचन काय की। तीनों प्रकार की शुद्धियों को यदि क्रम से प्राप्त कर लेते हैं तो हम समाधि मरण को प्राप्त हो सकते हैं।













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