खैरवाड़ा के नेमिनाथ मंदिर में दशलक्षण पर्व पर पहली बार 11 तपस्वियों ने दस उपवास की तपस्या पूरी कर सामूहिक पारणा किया। आर्यिका सुप्रज्ञमति माताजी ससंघ के सानिध्य में भव्य आयोजन हुआ। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
सदर बाजार स्थित नेमिनाथ मंदिर, खैरवाड़ा में चतुर्थ पट्टाचार्य सुनिलसागरजी गुरुदेव की सुयोग्य शिष्या आर्यिका सुप्रज्ञमति माताजी ससंघ के सानिध्य में दशलक्षण पर्व पर प्रथम बार खैरवाड़ा में 11 तपस्वियों ने दशलक्षण महापर्व के दस उपवास किए। भादरवा सुदी पूर्णिमा के दिन स्वाध्याय भवन में सभी का सामूहिक पारणा करवाया गया।
दशा हुमड़ समाज के अध्यक्ष विरेंद्र वखारिया, मंत्री पंकज शाह और उपाध्यक्ष विपिन वखारिया ने बताया कि पूर्णिमा को सुबह भगवान का अभिषेक, शांति धारा माताजी ससंघ के सानिध्य में नेमिनाथ मंदिर में हुई। बाद में सुप्रज्ञमति माताजी ने प्रवचन दिए। इसके पश्चात खड़क महासभा के संरक्षक श्रीमान बी.टी. शाह का स्वागत किया गया और उनके सानिध्य में कल्पद्रुम महामंडल विधान की पत्रिका का विमोचन हुआ।
तपस्वियों के पारणा में बाहर से पधारे सभी साधर्मी बंधुओं को कल्पद्रुम महामंडल विधान में पधारने का निवेदन किया गया। यह 25 समोशरण वाला कल्पद्रुम महामंडल विधान पूरे राजस्थान में पहली बार खैरवाड़ा में हो रहा है।
दशलक्षण महापर्व के दस उपवास किए
तप करने वालों में जीया बेन फड़िया, रानु बेन पंचोली, खुशबु शाह, चारवी गांधी, दीपकला बेन वखारिया, खुशी शाह, ममता बेन वखारिया, अनीषा जैन, रोशनजी नागदा, आर्यिका अनघमति माताजी के गृहस्थ जीवन की शकुंतला बेन और मोहनजी मा सा ने दशलक्षण महापर्व के दस उपवास किए। इसके अतिरिक्त पंचमेरु के पांच उपवास भी साधर्मी भाई-बहनों ने किए। इनमें हितांशी पीयूषजी नागदा, रोनिका (भंवर जी शाह की पुत्री), रुपम (दिलीपजी शाह की पुत्री) और मौली (प्रफुल्ल जी शाह की पुत्री) शामिल रही। चातुर्मास समिति के अध्यक्ष नरेंद्र जी पंचोली और मंत्री कुलदीप जी शाह ने सभी तपस्वियों के तप की हृदय से अनुमोदना की।













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