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संपत्ति और भौतिक मोह का त्याग कर आत्मिक उन्नति करें : मुनिश्री गुरूदत्त सागर जी ने उत्तम आकिंचन्य धर्म का किया विवेचन


नगर के प्रमुख धार्मिक स्थल श्री अजितनाथ बड़ा जैन मंदिर में दशलक्षण पर्व के उत्तम आकिंचन्य दिन का आयोजन भव्य रूप से संपन्न हुआ। प्रातःकालीन बेला में मुनिश्री गुरुदत्तसागर जी एवं मुनिश्री मेघ दत्तसागर जी के सानिध्य में सामूहिक अभिषेक पूजन हुआ। महरौनी से पढ़िए, यह खबर…


महरौनी। नगर के प्रमुख धार्मिक स्थल श्री अजितनाथ बड़ा जैन मंदिर में दशलक्षण पर्व के उत्तम आकिंचन्य दिन का आयोजन भव्य रूप से संपन्न हुआ। प्रातःकालीन बेला में मुनिश्री गुरुदत्तसागर जी एवं मुनिश्री मेघ दत्तसागर जी के सानिध्य में सामूहिक अभिषेक पूजन हुआ। जिसमें श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म की शुद्धि और आत्मिक लाभ प्राप्त किया। इस अवसर पर दोनों मुनिश्री ने उत्तम आकिंचन्य धर्म पर विशेष प्रवचन दिया। मुनिश्री गुरुदत्त सागर जी ने बताया कि “संपत्ति और भौतिक मोह का त्याग कर आत्मिक उन्नति की जा सकती है और जीवन में जितना संभव हो, भौतिक वस्तुओं और लालसा से दूर रहकर सच्चे सुख और मोक्ष की प्राप्ति की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए।

मुनिश्री मेघ दत्तसागरजी ने अपने प्रवचन में कहा कि मोह त्याग केवल संपत्ति तक सीमित नहीं, बल्कि मन के अटके विचार और लालसा को भी त्यागना आवश्यक है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि इस दिन का लाभ उठाकर सच्चे आत्मिक मूल्य और संयम अपनाएं। सांध्यकालीन बेला में मैना सुंदरी नाटक का मंचन हुआ। जिसमें धर्माेपदेश और उत्तम धर्म के महत्व को दर्शाया गया। इसके साथ ही श्री यशोदय सुधा सागर महिला मंडल ने सपना सिंघई के नेतृत्व में नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को और भी भव्य बनाया। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही, जिन्होंने पूरे दिन विशेष भक्ती के साथ पूजा-अर्चना में भाग लिया। वहीं नगर के चंद्राप्रभु, शांतिनाथ और श्री यशोदय तीर्थ में भी दशलक्षण पर्व की भव्य धूम देखने को मिली।

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