श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन शनिवार को धर्मसभा में मुनि श्री गुरुदत्त सागरजी महाराज ने उत्तम आर्जव धर्म पर प्रवचन देते हुए कहा कि आर्जव का अर्थ है- सरलता, सच्चाई और ईमानदारी। यह तभी संभव है जब व्यक्ति छल-कपट, मायाचारी और कुटिलता का त्याग करे। महरौनी से पढ़िए, यह खबर…
महरौनी। श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन शनिवार को धर्मसभा में मुनि श्री गुरुदत्त सागरजी महाराज ने उत्तम आर्जव धर्म पर प्रवचन देते हुए कहा कि आर्जव का अर्थ है- सरलता, सच्चाई और ईमानदारी। यह तभी संभव है जब व्यक्ति छल-कपट, मायाचारी और कुटिलता का त्याग करे। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने दोषों या गलतियों को छिपाने के बजाय स्वीकार करना चाहिए। सभी प्राणियों के प्रति सरल और सच्चा व्यवहार करने से मन, वचन और काय की स्वच्छता आती है, जो आत्मशुद्धि और आत्मिक शांति का मार्ग प्रशस्त करती है। मुनि श्री मेघ दत्त सागरजी ने कहा कि जीवन में किसी भी प्रकार का छल, धोखाधड़ी या ठगी का भाव नहीं रखना चाहिए।
धर्म हमें सरलता से जीने और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मन में जो विचार हों, वही वाणी और कर्म में झलकने चाहिए। इससे व्यक्ति के जीवन में शांति और संतोष का अनुभव होता है। धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। इस मौके पर कोमल चंद सिंघई, अनिल मिठया, हेमंत सिंघई, प्रकाश चंद्र सिंघई, रिषभ सिंघई, प्रसन्न सिंघई, ऋषभ कठरया, पवन मोदी, प्रदीप चौधरी, प्रवीण सिंघई, जिनेश्वर बुखारिया, शिखर चंद मिठया, सुनील मोदी, प्रमोद चौधरी, अजित कठरया, आमोद चौधरी, आकरष बड़कुल, राकेश सतभैया, नीलेश सराफ, राजू कठरया, आकाश चौधरी, शानू बड़कुल, रमेश भायजी, अजय अंकुर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।













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