धर्म सभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने संत समागम, स्वाध्याय, अभिषेक पूजन और धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने जीवन निर्मल होने, सम्यक दर्शन प्राप्त करने और महाव्रत पालन करने के महत्व को बताया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
दिगंबर मंदिर में प्रतिदिन भगवान के दर्शन और अभिषेक पूजन करने से धर्म की प्राप्ति होती है। स्वाध्याय और चिंतन से सम्यक दर्शन की प्राप्ति संभव है, जो संसार के समुद्र को पार करने का माध्यम है। जीवन में परिवर्तन किसी न किसी निमित्त से होता है।
श्रुतसागर जी महाराज ने अपने पुत्र कुल में उजाला किया और गृहस्थ अवस्था में यात्रा कर महा ज्ञान अर्जित किया। परिग्रह सर्वनाश की कामना कर उन्होंने संयम दीक्षा धारण की। आचार्य वीर सागर जी से मुनि दीक्षा प्राप्त कर उन्होंने मुनि श्री श्रुतसागर जी का रूप लिया।
पुण्य अर्जित करने की विधि समझाई
संत समागम और धर्म श्रद्धा पूर्वक करने से जीवन निर्मल होता है। आचार्य श्री ने महाव्रत पालन, दीक्षा प्रदान करना, अभिषेक पूजन, स्वाध्याय चिंतन और धार्मिक अनुशासन पर जोर दिया। चौबीसी व्रत, ईसरी चातुर्मास और उपवास का महत्व बताते हुए उन्होंने धार्मिक पर्वों में पुण्य अर्जित करने की विधि समझाई।प्रवचन में यह भी बताया गया कि पूजा के समय कपड़े साफ और बिना छिद्र होने चाहिए तथा पूजन सामग्री उत्तम हो। सही साधना और दान से पुण्य की वृद्धि होती है और व्रत भंग करने पर पुण्य समाप्त हो जाता है।













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