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मौन, समझ और संवेदना यही रिश्तों की असली ताकत : मुनि श्री सर्वार्थ सागर जी ने भावनाओं को सबसे शक्तिशाली बताया


पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी ससंघ का चातुर्मास पथरिया में चल रहा है। यहां प्रतिदिन मुनियों के प्रवचन हो रहे हैं। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन मौजूद रहे। पथरिया से पढ़िए, यह खबर…


पथरिया। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील, कोल्हापुर ने कहा कि पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी ससंघ का चातुर्मास पथरिया में चल रहा है। यहां प्रतिदिन मुनियों के प्रवचन हो रहे हैं। रविवार को मुनि श्री सर्वार्थ सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि कुछ सवाल आंखों में ही ठीक रहते हैं। कुछ सवाल आंखों में ही ठीक रहते हैं, ज़ुबान पर आते ही रिश्ते टूट जाते हैं। ये दो पंक्तियां सिर्फ शायरी नहीं है, जीवन का गहरा अनुभव हैं। हम अक्सर सोचते हैं कि हर बात पूछी जाए, हर बात का उत्तर मिले पर क्या हर उत्तर ज़रूरी होता है? जीवन में कुछ रिश्ते भावना से जुड़ते हैं, तर्क से नहीं। कभी-कभी हम ऐसे सवाल पूछ बैठते हैं, क्यों देर की?, किसके साथ थे?, इतना प्यार क्यों नहीं जताते? और इन सवालों में शक, उम्मीद और अहंकार छिपा होता है। ऐसे सवाल जब ज़ुबान पर आते हैं, तो सामने वाला उत्तर नहीं दे पाता वो टूटता है और साथ में रिश्ता भी टूटने लगता है। पर अगर वही सवाल नज़रों में समझ लिए जाएं, मौन में महसूस कर लिए जाएं तो रिश्ते गहराते हैं।

प्रेम, विश्वास और समझ ये तर्क से नहीं, मौन से पनपते हैं। हर चीज़ को बोल कर नहीं, कुछ को सिर्फ दिल से समझकर संभाला जाता है। इसलिए अगली बार जब कोई सवाल उठे तो सोचिए, क्या ये ज़ुबान पर लाना ज़रूरी है? कहीं ऐसा न हो कि जवाब की तलाश में आप किसी की ख़ामोशी खो दें। मौन, समझ और संवेदना यही रिश्तों की असली ताकत है।

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