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समाज को तनाव में डालने वाली प्रतिक्रिया से बचें : जैन समाज और जैन धर्म की सुरक्षा ही हमारा कर्तव्य 


किसी भी चैनल या सोशल मीडिया के माध्यम से कोई प्रतिक्रिया न दें और इस अनिष्टकारी विवाद को यहीं समाप्त कर निकट आ रहे सबसे बडे पर्व यानि पर्वराज पर्यूषण की तैयारियों में जुट जाएं एवं आत्म कल्याण एवं जनकल्याण के निमित्त कार्य करते हुए अपने जीवन को सफल बनाएं। चंदेरी से पढ़िए, अमित जैन एडवोकेट की यह समाजोपयोगी अपील…


चंदेरी। कुछ दिनों से मन बहुत व्यथित है सोचा कि मन की व्यथा समस्त मुनि संघ, समस्त आर्यिका संघ एवं समस्त समाज जनों तक पहुंचाई जाए। जैसा कि आप सभी लोगों को विदित है कि कुछ दिनों पहले एक समाज जन बुजुर्ग ने अशोकनगर में निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के समक्ष एक जिज्ञासा रखी। जिसको लेकर पूरे भारत वर्ष के जैन समाज में तनाव तथा बिखराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। समाज जनों से विनम्रता पूर्वक एक आग्रह एक निवेदन करना चाहता हूं कि इस तरह की जिज्ञासाएं या मन के भाव सार्वजनिक मंचों से उद्घोषित न करें और समाज के जिम्मेदार व्यक्तियों से भी आग्रह और निवेदन है कि इस तरह की जिज्ञासाओं को जिनसे समाज में तनाव और बिखराव की स्थिति उत्पन्न होने की संभावना है, प्रचारित या प्रसारित न करें और न ही किसी अन्य को करने दें। अगर किसी वजह से इस तरह की जिज्ञासाएं या किसी के मन के भाव सोशल मीडिया पर प्रचारित या प्रसारित हो भी जाएं तो धर्म को बचाने के लिए और समाज में सामंजस्यता बनाए रखने के लिए समाजजन, मुनिसंघ, एवं समस्त आर्यिका संघ सार्वजनिक मंचों से ऐसी जिज्ञासा और किसी के मन के भावों के प्रति प्रतिक्रिया स्वरूप कुछ भी गलत या अशिष्ट भाषा का उपयोग न करे क्योंकि, वैसे ही जैन धर्म और जैन समाज इस दुनिया में बहुत कम है।

अगर मुनिसंघ, आर्यिका संघ एवं समस्त जैन-जैनेत्तर समाज इसी तरह से सार्वजनिक मंचों एवं सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया स्वरूप अशिष्ट भाषा का उपयोग करते रहेंगे तो समाज में तनाव तथा बिखराव की स्थिति उत्पन्न होती रहेगी। अतः धर्म और समाज से जुडे होने के नाते धर्म को चिरकाल तक इस दुनिया में बचाए रखने के लिए समस्त मुनिसंघों, समस्त आर्यिका संघों एवं समस्त समाज जनों से विनम्रता पूर्वक आग्रह एवं निवेदन करता हूं कि किसी भी चैनल या सोशल मीडिया के माध्यम से कोई प्रतिक्रिया न दें और इस अनिष्टकारी विवाद को यहीं समाप्त कर निकट आ रहे सबसे बडे पर्व यानि पर्वराज पर्यूषण की तैयारियों में जुट जाएं एवं आत्म कल्याण एवं जनकल्याण के निमित्त कार्य करते हुए अपने जीवन को सफल बनाएं। मेरे शब्दों से या मेरी बातों से किसी के दिल को ठेस लगी हो, या किसी का दिल दुखी हुआ हो तो मैं आप सभी करबद्ध होकर क्षमा याचना करता हूं।

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