पथरिया में चातुर्मास के दौरान मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी महाराज ने कहा कि किसी की तकलीफ़ को समझना शक्ति नहीं, बल्कि सच्ची इंसानियत की निशानी है। उन्होंने करुणा, संवेदना और प्रेम के माध्यम से जीवन जीने का संदेश दिया। पढ़िए विस्तृत खबर…
पथरिया। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील ने बताया कि पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज ससंघ का चातुर्मास इन दिनों पथरिया में चल रहा है। उनके शिष्य, विचित्र वाणी के प्रणेता सर्वार्थ सागर जी महाराज ने एक विशेष प्रवचन में कहा कि दूसरे की तकलीफ़ समझना ताक़त की नहीं, इंसानियत की निशानी है। उन्होंने बताया कि वर्तमान युग में लोग सफलता देखकर ईर्ष्या तो करते हैं, लेकिन किसी की पीड़ा देखकर रुकते नहीं। ऐसे में जो रुकता है, सहानुभूति जताता है और दूसरों की भावनाओं को समझता है, वही सच्चा इंसान है।
*टूटे दिल को जोड़ने के लिए करुणा और प्रेम चाहिए*
उन्होंने आगे कहा कि ताक़त से आप इमारत बना सकते हैं, लेकिन टूटे दिल को जोड़ने के लिए करुणा और प्रेम चाहिए। मुनिश्री ने सभी को आह्वान किया कि जीवन केवल स्वयं के लिए













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