राजस्थान के टोंक में जैन संत क्षुल्लक विशाल सागर महाराज ने दीक्षा लेने के कुछ ही पलों बाद समाधि मरण प्राप्त किया। यह दृश्य हजारों श्रद्धालुओं की आंखों के सामने घटित हुआ और समूचे जैन समाज को भावविह्वल कर गया। पढ़िए पूरी खबर…
टोंक (राजस्थान)। ऐतिहासिक नगर टोंक रविवार को एक अलौकिक और अत्यंत दुर्लभ आध्यात्मिक प्रसंग का साक्षी बना। जैन धर्म के अनुयायी क्षुल्लक विशाल सागर जी महाराज को जैसे ही आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ने मुनि दीक्षा प्रदान की, उसके कुछ ही क्षणों में उन्होंने समाधि मरण प्राप्त कर लिया।
यह पूरी घटना दिगंबर जैन अमीरगंज नसिया मंदिर में हुई, जहां “शांति समागम” नामक पत्रकार गोष्ठी के बीच यह अप्रत्याशित दृश्य घटा। आचार्य श्री ने जैसे ही दिव्य दृष्टि से इस घटना का संकेत दिया, वैसे ही हजारों श्रद्धालुओं के बीच क्षुल्लक विशाल सागर महाराज को विधिवत मंत्रोच्चार, केसर एवं लोंग से मुनि दीक्षा दी गई।
दीक्षा के ठीक 1:35 बजे मुनि दीक्षा प्राप्त हुई और लगभग 3:00 बजे उनका समाधि मरण हुआ। इस दिव्य प्रसंग के पश्चात चक्र यात्रा निकाली गई जो समाधि स्थल तक पहुँची, जहाँ पंडितों और आचार्य श्री द्वारा अंतिम संस्कार विधि सम्पन्न की गई।
आचार्य श्री के 36 वर्ष के आचार्य काल की 117वीं दीक्षा
विशेष बात यह रही कि नवदीक्षित मुनि विशाल सागर महाराज की गृहस्थ अवस्था में पत्नी स्वयं श्री विचक्षण मति माताजी हैं और सासू माँ ने भी पूर्व में आचार्य वर्धमान सागर जी से दीक्षा प्राप्त की थी। यह दीक्षा आचार्य श्री के 36 वर्ष के आचार्य काल की 117वीं दीक्षा थी। समाज के प्रमुख जन – अध्यक्ष पदम चंद आंडरा, मंत्री महावीर प्रसाद देवली, भागचंद फुलेता, धर्मचंद दाखिया, नरेंद्र छामुनिया, कमल सर्राफ सहित अनेक गणमान्य लोग इस चमत्कारिक घटना के साक्षी बने।













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