श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर उपरोचिया जैसवाल जैन पंचायती मन्दिर, छीपीटोला में पावन विद्यामृत वर्षायोग 2025 कलश स्थापना सोमवार को मुनि श्री सौम्य सागर एवं मुनि श्री निश्चल सागर महाराज के सानिध्य में सोमवार दोपहर 1 बजे निर्मल सेवा सदन रकाबगंज थाने के पीछे छीपीटोला में हुई। छीपीटोला से पढ़िए शुभम जैन की यह खबर…
छीपीटोला। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर उपरोचिया जैसवाल जैन पंचायती मन्दिर, छीपीटोला में पावन विद्यामृत वर्षायोग 2025 कलश स्थापना 14 जुलाई को आचार्य श्री विद्यासागर जी के शिष्य मुनि श्री सौम्य सागर एवं मुनि श्री निश्चल सागर महाराज के सानिध्य में सोमवार दोपहर 1 बजे निर्मल सेवा सदन रकाबगंज थाने के पीछे छीपीटोला में हुई। जहाँ देश के कोने से कोने से श्रृद्धालु आएंगे। मुनि श्री सौम्य सागर महासागर ने बताया कि चातुर्मास आषाढ़ शुक्ल चतुदर्शी से आरम्भ और कार्तिक कृष्ण अमावस्या पर समाप्त होती है। यह चार माह श्रावण, भाद्रपद, अश्विन और कार्तिक के चार माह चातुर्मास कहा जाता है। इन चार माह में व्रत, भक्ति, साधना, तप, स्वाध्याय किया जाता है। यह चार माह में संत यात्राएँ बन्द करके एक जगह पर रहते है और अपनी व्रत साधना का पालन करते है। मुनि संघर स्व के कल्याण के साथ-साथ पर कल्याण भी करते है।
चारों गतियों के परिभ्रमण को मिटा दे, वह चातुर्मास है। जो तत्व की उपलब्धि के लिये आत्म बोध करा दे। वह है चातुर्मास। समस्या से तपस्या की ओर जाने का नाम है। चातुर्मास। भोग से योग की ओर अग्रसर होने का नाम है चतुर्मास। अपने अंदर समता धारण करने का नाम है चातुर्मास। यह चार महीने में जीवों की उत्पत्ति बहुत अधिक होती है। इसलिए जीवों की हिंसा न हो। मुनि चार महीने एक जगह रहकर तप साधना स्वाध्याय करते हैं। इन चार महीने में मुनिगण श्रावको को स्वाध्याय, प्रवचन, शका समाधान करके जन कल्याण करते है। इस चातुर्मास में मुनि श्री के सान्धिय में विभिन्न कार्यक्रम होंगे। इसमें मोक्ष सप्तमी पर्व रक्षा बंधन पर्व दश लक्षण पर्व आदि मनाए जाएंगे।
चातुर्मास पत्रिका का विमोचन
मुनि श्री सौम्या सागर जी महाराज के सानिध्य में चातुर्मास पत्रिका का विमोचन जैन भवन छिपी टोला में हुआ। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर कमेटी के अध्यक्ष मनोज कुमार जैन वल्लो, मंत्री मुरारीलाल जैन चातुर्मास कमेटी के संयोजक अनिल फौजी, अक्षय जैन, संजीव जैन, प्रवेश जैन, सतेन्द्र जैन, मनोज जैन, राकेश जैन, दीपक जैन, चन्द्रमोहन जैन, हेमन्त जैन आदि उपस्थित रहे।













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