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मुनिराजों के सानिध्य में मंत्र जाप्य अनुष्ठान किया: पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न की


नगर में विराजमान द्वय मुनिराज निरंतर धर्म वृद्धि के लिए प्रतिदिन धर्म की गंगा प्रवाहित कर रहे हैं। मुनि श्री विश्व सूर्य सागर जी महाराज, मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज के सानिध्य में रविवार को प्रातःकाल श्री पार्श्वनाथ बड़ा दिगंबर जैन मंदिर में पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न की गई। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर…


सनावद। नगर में विराजमान द्वय मुनिराज निरंतर धर्म वृद्धि के लिए प्रतिदिन धर्म की गंगा प्रवाहित कर रहे हैं। मुनि श्री विश्व सूर्य सागर जी महाराज, मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज के सानिध्य में रविवार को प्रातःकाल श्री पार्श्वनाथ बड़ा दिगंबर जैन मंदिर में पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न की गई। शांतिधारा करने का सौभाग्य कमलकुमार केके परिवार को प्राप्त हुआ। धर्म सभा के प्रारंभ में राजन जैन ने मंगलाचरण किया। मुनि श्री साध्यसागर जी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि द्रव्य गुण पर्याय में से गुण हटा दो, पर्याय को हटा दो तो द्रव्य को निहारो द्रव्य आत्मा है।

आत्मा में देखने-सुनने की शक्ति ना हो तो आत्मा पुण्यवृति नहीं हो सकता। मुनिश्री विश्वसूर्य सागर जी ने कहा कि जब भी आत्मा का कल्याण होगा। वो प्रभु की देशना से ही होगा। एक स्वाध्याय ही ऐसा रास्ता है। जो तुम्हारे आत्मा के गुणों को दूर करती है। दोपहर के सत्र में मुनि श्री साध्य सागर जी के द्वारा मंत्र जाप्य अनुष्ठान करवाया गया। जिसमें मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज ने एक-एक मंत्र का शुद्ध उच्चारण कर जाप करवाए। सभी समाजजनों ने एक-एक दीप प्रज्वलित कर महाराज जी द्वारा उच्चारित मंत्रों का जाप किया एवं णमोकार महामंत्र के एक-एक उच्चारण कों कैसे बोलना उसका क्या फल है एवं जाप करते हुए माला के एक-एक दाने का महत्व बताया। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे ।

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Shreephal Jain News

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