मुनि श्री वैराग्य सागरजी और मुनि श्री सुप्रभ सागर जी का वर्ष 2025 का चातुर्मास देवपुरा बूंदी में होने जा रहा है। दोनों मुनि महाराजों का मंगल प्रवेश 23 जून को मधुबन कॉलोनी में स्थित मुनि सुव्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर में हुआ। यहां पर मुनिराज धर्म की प्रभावना करते हुए रजतगृह कॉलोनी के साथ-साथ नागदी बाजार में भी धर्म प्रभावना करेंगे। बूंदी से पढ़िए, यह खबर…
बूंदी। आचार्य सुमति सागर महाराज के शिष्य मुनि श्री वैराग्य सागरजी एवं आचार्य वर्धमान सागर के शिष्य मुनिश्री सुप्रभ सागर जी महाराज का वर्ष 2025 का चातुर्मास देवपुरा बूंदी में होगा। दोनों मुनि महाराजों का मंगल प्रवेश 23 जून को मधुबन कॉलोनी में स्थित मुनि सुव्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर में हुआ। यहां पर मुनिराज धर्म की प्रभावना करते हुए रजतगृह कॉलोनी के साथ-साथ नागदी बाजार में भी धर्म प्रभावना करेंगे। उसके बाद 7 जुलाई को चातुर्मास के लिए नागदी बाजार से भव्य जुलूस के साथ देवपुरा बूंदी में मंगल प्रवेश होगा।
मधुबन कॉलोनी में स्थित मुनि सुव्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर में प्रवचन में मुनिश्री सुप्रभ सागर महाराज ने कहा कि आज का व्यक्ति भौतिक सुख सुविधाओं से अपनी पहचान मानता है जबकि, सही अर्थ में आत्मा की पहचान करना चाहिए। आत्मा की पहचान करने के लिए ज्ञान का अर्जन करना चाहिए तथा ज्ञान के अर्जन के लिए मनुष्य को सजगता लानी चाहिए। उन्होंने धर्मसभा में कहा कि आज मनुष्य भौतिकता की ओर अपने जीवन को लेकर जाता है लेकिन, असल में आत्म कल्याण ही सत्य मार्ग है। जो विपरीत ज्ञान को रखता है वह व्यक्ति अज्ञानी है। मुनिश्री वैराग्य सागर महाराज ने धर्म सभा में कहा कि देव शास्त्र गुरु की भक्ति करने पर सुंदर रूप की प्राप्ति होती है।
श्रावक को परिवार में रहकर भी षष्ट आवश्यक का पालन करना चाहिए। रागी व्यक्ति सदैव संकलेश्न में जीवन जीता है। चंचल मन कभी आत्म शांति की प्राप्ति नहीं कर सकता। इस अवसर पर दीप प्रज्वलन दुर्लभ जठयानीवाल एवं राजकुमार जैन ने किया। मुनिश्री को शास्त्र भेंट रविंद्र काला, रमेश बडजात्या ने किया। मंगलाचरण शकंुतला बडजात्या ने किया एवं धर्मसभा का संचालन नमन जैन ने किया।













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