पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज जी ससंघ का विहार विदिशा से सागर की ओर चल रहा है। पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी की यहां धर्मसभा हो रही है। सागर से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…
सागर। पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज जी ससंघ का विहार विदिशा से सागर की ओर चल रहा है। पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी की यहां धर्मसभा हो रही है। इसमें उन्होंने कहा कि जैसी सोच वैसा जीवन, हमारा जीवन बाहर से नहीं, भीतर से बनता है। जैसी हमारी सोच होती है, वैसा ही हमारा संसार बनता है।
उन्होंने कहा कि अगर हम हर बात में नकारात्मकता खोजते हैं, तो दुनिया भी अंधेरी लगती है लेकिन, जब हम आशा, प्रेम और विश्वास से सोचते हैं, तो वही जीवन हमें अवसर देता है। विचार बीज हैं जो बोओगे, वही काटोगे। इसलिए अपने मन की ज़मीन को साफ़ रखो, और उसमें अच्छे विचारों का बीज बोओ। हर सुबह सकारात्मक सोच से दिन की शुरुआत करो और देखो, कैसे चमत्कार होते हैं। सोच बदलो जीवन अपने आप बदल जाएगा।













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