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आर्यिका भरतेश्वरी मति माताजी का गीगंला में मंगल प्रवेशः जैनसमाज श्रेष्ठियों ने अगवानी कर पुण्यार्जन किया


आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार को आचार्य विमलसागरजी से व्रतों को धारण कर आचार्य भरत सागर जी महाराज जी से दीक्षित आर्यिका भरतेश्वरी मति माताजी ससंघ का गीगंला नगर में पदार्पण हुआ। आर्यिका माताजी ने 2012 का चातुर्मास गीगंला में किया था। इसके 13 वर्ष बाद पुनः गीगंला आगमन हुआ। लोगों ने ढोल नगाडों सहित तीन किमी आगे जाकर उनकी अगवानी की। मंदिर में श्रीजी के दर्शन के बाद आर्यिका माताजी के पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट एवं आरती की। गीगंला से पढ़िए, लक्ष्मीलाल चंपालाल जैन (बंबोरिया) की यह खबर…


गीगंला। आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार को आचार्य विमलसागरजी से व्रतों को धारण कर आचार्य भरत सागर जी महाराज जी से दीक्षित आर्यिका भरतेश्वरी मति माताजी ससंघ का गीगंला नगर में पदार्पण हुआ। आर्यिका माताजी ने 2012 का चातुर्मास गीगंला में किया था। इसके 13 वर्ष बाद पुनः गीगंला आगमन हुआ। गीगंला वासियों ने कई बार अडिंदा जाकर चातुर्मास के लिए निवेदन किया लेकिन, माताजी ने अनुमति नहीं मिली। इस वर्ष का चातुर्मास आर्यिका माताजी की जन्म भूमि लोहारिया में करना तय हो चुका है। गीगंला के लोगों ने ढोल नगाडों सहित तीन किमी आगे जाकर उनकी अगवानी की। मंदिर में श्रीजी के दर्शन के बाद आर्यिका माताजी के पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट एवं आरती की बोली जयंतीलाल मोहनलाल केलावत ने लेकर पुण्यार्जन किया और माताजी का आशीर्वाद प्राप्त किया। अर्घ्य सभी पंचों ने चढ़ाकर कुछ अधिक समय गीगंला को देने का निवेदन किया।

मुनियों और माताजी से किया चातुर्मास का निवेदन 

ज्ञातव्य है कि गीगंला पंचांे ने मुनिश्री अपूर्व सागरजी, मुनिश्री अर्पित सागर जी, मुनिश्री विवर्जित सागर जी महाराज को चातुर्मास का अनेक बार अनुनय-विनय निवेदन किया है। गणिनी आर्यिका सुभूषण मति माताजी को भी चातुर्मास के लिए बहुत अनुनय-विनय निवेदन किया एवं मुनि श्री विश्व विजय सागर जी एवं विशुभ सागरजी को भी गीगंला में 2025 का चातुर्मास करने के लिये बहुत आग्रह किया है। आचार्य पुण्य सागर जी महाराज को भी श्रीफल तो भेंट किया लेकिन, उनकी इस साल संभावना नहीं थी। अभी गीगंला के भाग्य में पुण्यार्जन करने के लिए किसकी लॉटरी निकलती है। अभी तक कहना मुश्किल है। कोशिश सभी जगह जारी है क्योंकि, गुरु बिना ज्ञान नहीं मिल सकता और मुनि आर्यिका के बिना धर्म लाभ और पुण्यार्जन के अधिक अवसर नहीं मिल पाते।

सम्यक अर्थात समीचीन सही दर्शन

माताजी ने अपने प्रवचनों में तत्वार्थ सूत्र का पहला सूत्र ‘सम्यग् दर्शन ज्ञानचारित्राणि मोक्षमार्ग’ पर बहुत ही मार्मिक व्याख्या करते हुए कहा कि सम्यक् दर्शन सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चारित्र इन तीनों की एकता मोक्ष मार्ग है और मोक्ष महल की पहली सीढ़ी सम्यक दर्शन है। सम्यक् दर्शन प्राप्त करना सरल नहीं है। सबसे पहले अपने आप को शांत निराकुल बनाना पड़ता है। चाहे जितनी विपरित परिस्थितियां आ जाएं अपने परिणामों को बिगड़ने नहीं देना। सम्यक अर्थात समीचीन सही दर्शन के अनेक अर्थ है लेकिन, यहां पर दर्शन का अर्थ श्रद्धा लेना है। मोक्ष मार्ग में बिना श्रद्धा के कार्य की सिद्धि नहीं होती। सम्यग्दर्शन के 1 प्रशम -रागादी की तीव्रता नहीं होना अर्थात हर हाल में अपने आप को शांत बनाए रखना। 2 संवेग- संसार, शरीर और भोगों से भयभीत होना। 3 अनुकंपा- सभी जीवों पर दया के साथ साथ दूसरों को और अपने आप को भी दुःखी नहीं करना। 4 आस्तिक्य- जिवादि पदार्थ हैं, सात तत्व नव पदार्थाे स्वर्ग नरक शास्त्रों में बताई बातों पर दृढ श्रद्धान करना। बिना सम्यक दर्शन के ज्ञान और चारित्र मोक्ष नहीं पहुंचा सकते। इस तरह पहले ही दिन ज्ञान की गंगा बहा दी।

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