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पूजा में प्रमाद का कोई स्थान नहीं-आचार्य श्री वर्धमान सागरजीः गुणानुवाद कर पूजा में 1024 अर्घ्य समर्पण किए


पूज्यता ऐसे ही नहीं आती है। यह गुणों से प्राप्त होती है। पूजा में प्रमाद का कोई स्थान नहीं है। प्रमाद से पूजा के फल की प्राप्ति भी नहीं होती है। उक्त विचार श्री वर्धमान सागरजी ने श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर सभास्थल पर आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान आयोजन के सातवें दिन गुरुवार को आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। सिद्ध परमेष्ठी भगवान के गुणों का गुणानुवाद कर पूजा में 1024 अर्घ्य समर्पण किए जा रहे हैं। पढ़िए धरियावद से अशोक कुमार जेतावत की यह पूरी खबर…


धरियावद। जो पूज्य की पूजा करते हैं, वे स्वयं पूज्य बन सकते और पूज्यता को प्राप्त हो सकते हैं। पूज्यता ऐसे ही नहीं आती है। यह गुणों से प्राप्त होती है। पूजा में प्रमाद का कोई स्थान नहीं है। प्रमाद से पूजा के फल की प्राप्ति भी नहीं होती है। उक्त विचार वात्सल्य वारिधि आचार्य शिरोमणि श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर सभास्थल पर आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान आयोजन के सातवें दिन गुरुवार को आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने कहा कि आज सिद्ध परमेष्ठी भगवान के गुणों का गुणानुवाद कर पूजा में 1024 अर्घ्य समर्पण किए जा रहे हैं। आप सभी पूजा को निराकुलता पूर्वक संपन्न करें। आचार्यश्री ने बताया कि सिद्ध भगवान ने भी मनुष्य भव से ही कर्मों का नाश कर अरिहंत अवस्था को प्राप्त किया था और समस्त कर्मों का नाश कर सिद्ध अवस्था को प्राप्त किया।

आचार्य शांति सागरजी का मुनि दीक्षा दिवस मनाया

आचार्य श्री शांति सागरजी के मुनि दीक्षा दिवस पर आचार्यश्री ने कहा कि जिस प्रकार चक्रवर्ती राजा के आयुधशाला में चक्र रत्न उत्पन्न होता है, तो वह चक्रवर्ती राजा षटखंड के राज्य को जीत कर षटखंड का अधिपति राजा चक्रवर्ती राजा हो जाता है। उसी प्रकार चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागरजी अपने कर्मों पर विजय प्राप्त कर चारित्र चक्रवर्ती के पद को सार्थक किया था। आज हम सभी उन्हीं के बताए हुए धर्म मार्ग का अनुसरण कर रहे हैं। आप सब भी इस मार्ग पर चलने का प्रयत्न और पुरुषार्थ करें। हम उनके बताए आदर्श और उपकारों को भूला नहीं सकते हैं। उन महामना ने हम सभी पर परम उपकार किया है। हम उनके चरणों में कृतघ्नता प्रकट करते हुए विनयांजलि और श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन 

7 से 14 मार्च तक आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान आराधना पूजा में शुक्रवार को प्रातः बड़ी जयमाला के साथ हवन पूर्णाहुति का आयोजन होगा। प्रतिदिन सायंकाल श्रीजी की आरती, विधान मंडल की आरती, गुरु की आरती, गुरुवंदना के पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसमें निशांत शर्मा (दिल्ली) एंड पार्टी के कलाकारों और स्थानीय पात्रों के साथ प्रेरणास्प्रद कथानकों के साथ लघु नाटिकाओं का प्रभावी मंचन किया जा रहा है।

जिज्ञासाओं का शंका समाधान 

बुधवार रात्रि को सौधर्म इंद्र सभा दरबार लगा, जिसमें इंद्र-इंद्राणियों ने अनी जिज्ञासाओं का शंका समाधान किया। साथ ही गुरुवार को रात्रि में नेमि-राजुल नाटिका के माध्यम से राजकुमार नेमीकुमार के वैराग्य की प्रभावी नाटिका का मंचन किया गया।

श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद लिया

इसके पूर्व अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जैन और बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी के निर्देशन में अष्टान्हिका पर्व में श्री पुण्य सागरजी के संघस्थ परम तपस्वी मुनिराज श्री महोत्सव सागरजी महाराज और श्री उत्सव सागरजी व श्राविका श्रेष्ठ तारादेवी जैन (अहमदाबाद) वालों का आठ उपवास की साधना निरंतर चलने पर आचार्यश्री वर्धमान सागरजी को श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया।

शिक्षण सामग्री भेंट की व शिक्षिकाओं का सम्मान किया

साथ ही गुरुवार को सायं इसी सभास्थल पर श्री वर्धमान जैन पाठशाला के बच्चों को पाठशाला के बैग और शिक्षण सामग्री के किट वितरित कर पाठशाला की 10 शिक्षिकाओं का सम्मान किया गया। इस अवसर पर विधान के सौधर्म इंद्र परिवार जिग्नेश जी हर्षित जी चंपावत परिवार द्वारा पाठशाला के बच्चों को प्रतिमाह स्वैच्छिक पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा।

सामूहिक ढूंढोत्सव, बच्चों को वितरित होंगे खिलौने

विगत एक वर्ष के दौरान जन्मे जैन समाज के नन्हे बालक-बालिकाओं का दोपहर 1.30 बजे से क्षेत्रपाल मंदिर में एकत्रिकरण होकर दर्शन आशीर्वाद के पश्चात बैंड-बाजों के जुलूस के साथ श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिरजी प्रांगण में आचार्यश्री वर्धमान सागरजी ससंघ और मुनिश्री पुण्य सागरजी ससंघ मंगल आशीर्वाद और प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जैन, बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी, ब्रह्मचारी विकास भैया, पंडित विशाल जैन के निर्देशन में नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशुओं के साथ श्रीजी की पूजा परिक्रमा और आचार्यश्री द्वारा जैन संस्कार का मंत्रोच्चार पूर्वक आशीर्वाद प्रदान किया जाएगा। सायंकाल में समाज का सामूहिक स्नेहभोज आयोजन भी होगा। इससे पहले केसरियाजी दिगंबर जैन मंदिर और श्री महावीर स्वामी दिगंबर जैन मंदिर में भी ढूंढोत्सव कार्यक्रम आयोजित होगा।

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